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अपरिमेय सङ्ख्या

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गणितमे अपरिमेय सङ्ख्या (irrtional number) ऊ वास्तविक सङ्ख्या हे जे परिमेय नै हे, अर्थात् जेकरा भिन्न p /q के रूपमे व्यक्त नै कैल जा सकहे, जन्ने p आउ q पूर्ण सङ्ख्या हे, जेकरामे q गैर-शून्य हे आउ एहीसे परिमेय सङ्ख्या नै हे । अनौपचारिक रूपसे एकरा मन्ने हे कि एक अपरिमेय सङ्ख्याके एक सरल भिन्नके रूपमे प्रदर्शित नै कैल जा सके । उदाहरणला २ के वर्गमूल, आउ पाइ अपरिमेय सङ्ख्या हे ।

ई साबित हो सकहे कि अपरिमेय सङ्ख्या विशिष्ट रूपसे ऐसन वास्तविक सङ्ख्या हे जेकरा समापक या सतत दशमलवके रूपमे नै दर्शावल जा सकहे, हालाँकि गणितज्ञ एकरा परिभाषाके रूपमे नै ले हथ । कैण्टर प्रमाणके परिणामस्वरूप कि वास्तविक सङ्ख्या अगणनीय हे (परिमेय गणनीय) ई मानहे कि लगभग सभ वास्तविक सङ्ख्या अपरिमेय हे ।[] सम्भवतः सर्वाधिक प्रसिद्ध अपरिमेय सङ्ख्या हे π, e आउ √२.[][][] जखनि दु रेखाखण्डके लम्बाईके अनुपात अपरिमेय हे, त रेखाखण्डोके तारतम्यहीन के रूपमे वर्णित कैल जाहे, ऊ कौनो मापके आमरूपसे साझा नै करे । ई अर्थमे एक रेखाखण्ड l के माप एक रेखाखण्ड J हे जेकर "माप" ई अर्थमे l हे कि एक छोरसे दोसर छोर तक J के सभ प्रतिके सङ्ख्या 1 के समाने लम्बाई हासिल करहे ।

  1. साँचा:Harvrefcol. ISBN 978-0-486-60045-1
  2. The 15 Most Famous Transcendental Numbers
    Archived २००७-१०-२४ at the वेबैक मशीन. क्लिफर्ड ए. पिकोवर द्वारा URL 24 अक्टूबर 2007 के पुनः प्राप्त ।
  3. http://www.mathsisfun.com/irrational-numbers.html
    Archived २०१०-०८-२९ at the वेबैक मशीन URL पुनः प्राप्त 24 अक्टूबर 2007 ।
  4. एरिक डब्ल्यू वेइसटीन, मैथवर्ल्ड पर Irrational Number यूआरएल पुनः प्राप्त 26 अक्टूबर 2007 ।
  • एड्रियन-मारी लेगेन्द्र, Éléments de Géometrie, नोट IV, (1802), पेरिस
  • रॉल्फ वालिसर, अल्जेब्रिक नम्बर थिओरी एण्ड डायोफेण्टाइन अनेलिसिस मे "ऑन लेम्बर्ट्स प्रूफ ऑफ द इर्रेशनैलिटी ऑफ π", फ्राञ्ज हाल्टर-कॉख आउ रॉबर्ट एफ टीचि, (२०००), वाल्टर डे ग्रुयर