अभिकेन्द्रीय बल
जखनि केहु वस्तु केहु वृत्ताकार मार्ग पर गति करहे त ओकरा पर केन्द्र दन्ने एक बल कार्य करहे, ई बलके अभिकेन्द्रीय बल कहल जा हे । ई बलके अभावमे वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर नै चल सकहे ।
यदि कौनो m द्रव्यमानके पिण्ड v से r त्रिज्याके वृत्तीय मार्ग पर चलैत हे त ओकरा पर कार्यकारी वृत्तके केन्द्र दन्ने आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल f=mv2/r होवहे ।
कौनो पिण्डके तात्क्षणिक वेगके लम्बवत दिशामे गतिपथके केन्द्र दन्ने लगेवाला बल अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal force) कहला हे । अभिकेन्द्र बलके कारण पिण्ड वक्र-पथ पर गति करहे (न कि रैखिक पथ पर) । उदाहरणला वृत्तीय गतिके कारण अभिकेन्द्रीय बले हे ।

जन्ने:
- अभिकेन्द्रीय त्वरण हे,
- वेगके परिमाण (magnitude) हे,
- पथके वक्रता त्रिज्या हे,
- स्थिति सदिश हे,
- त्रिज्य सदिश हे,
- कोणीय वेग हे ।
न्यूटनके गतिके द्वितीय नियमके अनुसार यदि कहुँ कौनो त्वरण हे त त्वरणके दिशामे बल अवश्य लगैत होत । अतः यदि m द्रव्यमानके कण एकसमान वृत्तीय गति करैत होवे त ओकरा पर लगेवाला अभिकेन्द्रीय बलके मान निम्नलिखित सूत्र द्वारा देल जाइत: