अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)
| लेखक | कौटिल्य |
|---|---|
| भाषा | संस्कृत |
| विषय | राजनीति, अर्थनीति, सैन्यनीति |
| प्रकाशन तिथि | तृतीय शताब्दी ईसापूर्व |
| प्रकाशन स्थान | भारत |
| Text | अर्थशास्त्र (ग्रन्थ) at Wikisource |
| एगो शृङ्खलाके भाग |
| हिन्दु शास्त्र आउ ग्रन्थ |
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Rig vedic
Sama vedic Yajur vedic Atharva vedic |
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अन्य शास्त्र |
| सम्बन्धित हिन्दुग्रन्थ |
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कालक्रम |
अर्थशास्त्र कौटिल्य या चाणक्य (चौथा शताब्दी ईसापूर्व) द्वारा रचित संस्कृतके एक ग्रन्थ है ।[१] एकरामे राज्यव्यवस्था, कृषि, न्याय एवं राजनीति आदिके विभिन्न पहलु पर विचार कैल गेलै हे । अपने तरहके (राज्य-प्रबन्धन विषयक) ई प्राचीनतम ग्रन्थ है । एकर शैली उपदेशात्मक आउ सलाहात्मक है ।
ई प्राचीन भारतीय राजनीतिके प्रसिद्ध ग्रन्थ है । एकर रचनाकारके व्यक्तिनाम विष्णुगुप्त, गोत्रनाम कौटिल्य ('कुटिल' से व्युत्पत्न्न) आउ स्थानीय नाम चाणक्य (पिताके नाम 'चणक' होवेसे) हलै । अर्थशास्त्र (१५.४३१) मे लेखकके स्पष्ट कथन है:
- येन शास्त्रं च शस्त्रं च नन्दराजगता च भूः ।
- अमर्षेणोद्धृतान्याशु तेन शास्त्रमिदङ्कृतम् ॥ [२]
- ई ग्रन्थके रचना ऊ सब आचार्य कैलन जे अन्याय एवं कुशासनसे क्रुद्ध होके नन्दके हाथमे गेल शस्त्र, शास्त्र एवं पृथ्वीके शीघ्रतासे उद्धार कैलन हल ।
चाणक्य सम्राट् चन्द्रगुप्त मौर्य (३२३-२९८ ईपू) के महामन्त्री हलन । ऊ चन्द्रगुप्तके प्रशासकीय उपयोगला ई ग्रन्थके रचना कैलन हल । ई मुख्यतः सूत्रशैलीमे लिखल है आउ संस्कृतके सूत्रसाहित्यके काल आउ परम्परामे रखा जा सकऽ है । ई शास्त्र अनावश्यक विस्तारसे रहित, बुझे आउ ग्रहण करेमे सरल एवं कौटिल्य द्वारा ऊ सब शब्दमे रचा गेल है जिनकर अर्थ सुनिश्चित हो गेल है । (अर्थशास्त्र, १५.६)'
अर्थशास्त्रमे समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति, एवं धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश पड़ऽ है । ई विषयके जेत्ता ग्रन्थ अखनी तक उपलब्ध है ओकरामे से वास्तविक जीवनके चित्रण करेके कारण ई सबसे अधिक मूल्यवान् है । ई शास्त्रके प्रकाशमे न केवल धर्म, अर्थ आउ कामके प्रणयन आउ पालन होवहै अपितु अधर्म, अनर्थ एवं अवान्छनीयके शमनो होवहै (अर्थशास्त्र, १५.४३१) ।
ई ग्रन्थके महत्ताके देखैत ढेर विद्वान एकर पाठ, भाषान्तर, व्याख्या आउ विवेचन पर बड़ परिश्रमके साथे बहुमूल्य कार्य कैलन हे । शामशास्त्री आउ गणपति शास्त्रीके उल्लेख कैलन जा चुकल है । इनकर अतिरिक्त यूरोपीय विद्वानमे हर्मान जाकोबी (ऑन दि अथॉरिटी ऑव कौटिलीय, इं.ए., १९१८), ए. हिलेब्राण्ड्ट, डॉ॰ जॉली, प्रो॰ए.बी. कीथ (ज.रा.ए.सी.) आदिके नाम आदरके साथे लेल जा सकऽ है । अन्य भारतीय विद्वानमे डॉ॰ नरेन्द्रनाथ ला (स्टडीज इन ऐंशेण्ट हिन्दु पॉलिटी, १९१४), श्री प्रमथनाथ बनर्जी (पब्लिक ऐडमिनिस्ट्रेशन इन ऐंशेण्ट इण्डिया), डॉ॰ काशीप्रसाद जायसवाल (हिन्दु पॉलिटी), प्रो॰ विनयकुमार सरकार (दि पाज़िटिव बैकग्राउण्ड ऑव् हिण्दु सोशियोलॉजी), प्रो॰ नारायणचन्द्र वन्द्योपाध्याय, डॉ॰ प्राणनाथ विद्यालंकार आदिके नाम उल्लेखनीय है ।
एकरो देखथिन
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- अर्थ - चार पुरुषार्थमे से एक
- चाणक्यनीति - चाणक्य द्वारा रचित नीतिग्रन्थ
- नीतिसार - 'कामन्दक' द्वारा रचित ई ग्रन्थ कौटिल्यके अर्थशास्त्रके सारभूत सिद्धान्त (मुख्यतः राजनीति विद्या) के प्रतिपादन करऽ है ।
- भारतीय राजनयके इतिहास
- द प्रिन्स - मकियावेली कृत राजनीतिके पुस्तक
- कामन्दकीय नीतिसार
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ Roger Boesche (2002). The First Great Political Realist: Kautilya and His Arthashastra. Lexington Books. p. 7. ISBN 978-0739104019.
[...] is classically expressed in Indian literature in the Arthashastra of Kautilya
Siva Kumar, N.; Rao, U. S. (April 1996). "Guidelines for value based management in Kautilya's Arthashastra". Journal of Business Ethics. 15 (4): 415–423. doi:10.1007/BF00380362. ISSN 0167-4544. S2CID 153463180.The paper develops value based management guidelines from the famous Indian treatise on management, Kautilya's Arthashastra.
- ↑ कौटिल्य अर्थशास्त्रके हिन्दी भाषानुवाद (प्राणनाथ विद्यालङ्कार)
बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- कौटिल्यीय अर्थशास्त्र के मूलपाठ, देवनागरीमे
- कौटिल्य अर्थशास्त्रके हिन्दी भाषानुवाद (प्राणनाथ विद्यालङ्कार)
- कौटलीय अर्थशास्त्र (हिन्दी अनुवाद - प्राध्यापक उदयवीर शास्त्री)
- कौटिल्य अर्थशास्त्र (अनिल कुमार मिश्र)
- ARTHASHASTRA - Lessons for Management Theory and Practice by Dr. Anil M. Naik
- ArthaShastra (English Translation of Arthashastra)
- INDIGENOUS HISTORICAL KNOWLEDGE : Kautilya and His Vocabulary VOLUME I, (प्रदीप कुमार गौतम तथा अन्य)