अस्पृश्यता

अस्पृश्यता के शाब्दिक अर्थ है - न छूअल । एकरा सामान्य भाषामे 'छूआछूत' के समस्यो कहल जा है । अस्पृश्यताके अर्थ है कोनो व्यक्ति वा समूहके सब लोगके शरीरके सीधा छूएसे बचल या रोकल । ई मान्यता है कि अस्पृश्य लोगसे छूए, हियाँ तक कि उनकर परछैयो पड़ेसे उच्चजातिके लोग 'अशुद्ध' हो जा हथिन आउ अपन शुद्धता वापिस पावेला उनका पवित्र गङ्गाजलसे स्नान करे पड़ है । भारतमे अस्पृश्यताके प्रथाके संविधानके अनुच्छेद १७ के अन्तर्गत एक दण्डनीय अपराध घोषित कर देल गेलै हे । अनुच्छेद १७ निम्नलिखित है-
- 'अस्पृश्यता' के अन्त कैल जा है आउ ओकर कोनो रूपमे आचरण निषिद्ध कैल जा है । 'अस्पृश्यता' से उपजल कोनो निर्योग्यताके लागू कैल अपराध होतै जे विधि अनुसार दण्डनीय होतै ।
संवैधानिक प्रावधानके अतिरिक्त अस्पृश्यताके उन्मूलनला कुछ विधिक प्रावधानो कैल गेलै हे –
- (१) सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम- संसद् अस्पृश्यताके उन्मूलनला अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, १९५५ पारित कैलकै आउ १९७६ मे एकर संशोधन करके एकर नाम ‘सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम’ कर देल गेलै । ई अधिनियम अस्पृश्यताके एक दण्डनीय अपराधके रूपमे सम्बोधित कर है । ई अस्पृश्यतासे उत्पन्न होवेवाला कोनो प्रकारके अक्षमताके लागू करेला दण्डोके आदेश दे है ।
- (२) अनुसूचित जाति एवं जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम, १९८९ के अन्तर्गत प्रथम बार ‘उत्पीड़न’ शब्दके व्यापक व्याख्या कैल गेलै हे । केन्द्र सरकार ई अधिनियमसे प्राप्त शक्तिके प्रयोग करित १९५५ मे एक नियमावलीके निर्माणो कैलकै हे ।
- (३) २०१५ मे उपर्युक्त अधिनियममे संशोधनके माध्यमसे पुरान प्रावधानके आउ अधिक सख्त कर देल गेलै हे । एकरामे उत्पीड़नके परिभाषामे ढेर आउ कृत्य, जैसे - सिर आउ मोछ मूँड़वावल, चप्पलके माला पेहनावल, जनजातीय महिलाके देवदासी बनावल आदियोके सम्मिलित कैल गेलै हे । एकरामे मामलाके त्वरित निवारणला विशेष न्यायालयोके गठनके प्रावधान कैल गेलै हे ।
अस्पृश्यताके उत्पत्ति आउ ओकर ऐतिहासिकता पर अखनियो बहस होव है । मनुके मतमे शूद्र अछूत न हथिन जेकरा भीमराव अम्बेडकरो स्वीकार कैलन हे ।[१] भीमराव आम्बेडकरके मानल हलै कि अस्पृश्यता कमसे कम ४०० ई से है[२] आज संसारके प्रत्येक क्षेत्रमे चाहे ऊ राजनैतिक होवे अथवा आर्थिक, धार्मिक होवे या सामाजिक, सर्वत्र अस्पृश्यताके दर्शन कैल जा सक है । अमेरिका, इङ्ग्लैण्ड, जापान आदि यद्यपि वैज्ञानिक दृष्टिकोणसे विकसित आउ सम्पन्न देश है किन्तु अस्पृश्यताके रोगमे ओहु ग्रस्त है ।[उद्धरण चाही]
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ मनु के मत में शूद्र अछूत नहीं[मृत कड़ी] (डॉ सुरेन्द्र कुमार)
- ↑ आम्बेडकर, भीमराव रामजी; मून, वसन्त (1990). Dr. Babasaheb Ambedkar, Writings and Speeches, Volume 7.