आदि शङ्कराचार्य
| शिवावतार भगवान् श्रीमद् आदि शङ्कराचार्य | |
|---|---|
शिष्यके मध्यमे जगदगुरु आदि शङ्कराचार्य, राजा रवि वर्मा द्वारा (१९०४) मे चित्रित | |
| व्यक्तिगत विशिष्ठि | |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| जनम | लगभग ५०८ ईसा पूर्व लगभग ७५० ई॰ |
| निधन | केदारनाथ, पाल साम्राज्य वर्तमानमे उत्तराखण्ड, भारत |
आचार्य शङ्कर भारतीय महान् दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक आउ योगी हलन । ऊ अद्वैत वेदान्तके ठोस आधार प्रदान कैलन । भगवद्गीता, उपनिषद् आउ वेदान्तसूत्र पर लिखल इनकर टीका बड़ी प्रसिद्ध है । ऊ साङ्ख्यदर्शनके प्रधानकारणवाद आउ मीमांसा दर्शनके ज्ञान कर्म समुच्चयवादके खण्डन कैलन ।
योगी शङ्कराचार्यजीके जनम सन् ५०८ - ५०९ ईपू मे होलै हल ।[१][२][३][४][५][६][७][८][९][१०][११] ई भारतवर्षमे चारो कोनामे चार मठके स्थापना कैलन हल जे अखनियो तक बड़ी प्रसिद्ध आउ पवित्र मानल जा है आउ जेकरा पर आसीन संन्यासी 'शङ्कराचार्य' कहल जा हथिन । ऊ चार स्थान ई है -
ई अनेक विधर्मियोके अपन धर्ममे दीक्षित कैलन हल । ई भगवान् शङ्करके अवतार मानल जा हथिन । ई ब्रह्मसूत्रके बड़ी विशद आउ रोचक व्याख्या कैलन हे ।[१२]
उनकर विचारोपदेश आत्मा आउ परमात्माके एकरूपता पर आधारित है जेकर अनुसार परमात्मा एके समयमे सगुण आउ निर्गुण दोनहीँ स्वरूपमे रहऽ है । स्मार्त सम्प्रदायमे आचार्य शङ्करके शिवके अवतार मानल जा है । ई ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक आउ छान्दोग्योपनिषद् पर भाष्य लिखलन । वेदमे लिखल ज्ञानके एकमात्र ईश्वरके सम्बोधित समझलन आउ ओकर प्रचार एवं वार्ता पूरा भारतवर्षमे कैलन । ऊ समय वेदके समझके बारेमे मतभेद होवे पर उत्पन्न चार्वाक, जैन आदि मतके शास्त्रार्थ द्वारा खण्डित कैलन ।
कलियुगके प्रथम चरणमे विलुप्त आउ विकृत वैदिक ज्ञान विज्ञानके उद्भासित आउ विशुद्ध करके वैदिक वाङ्मयके दार्शनिक, व्यावहारिक, वैज्ञानिक धरातल पर समृद्ध करेवाला एवं राजर्षि सुधन्वाके सार्वभौम सम्राट् ख्यापित करेवाला चतुराम्नाय चतुष्पीठ संस्थापक नित्य आउ नैमित्तिक युग्मावतार श्रीशिवस्वरुप भगवत्पाद शङ्कराचार्यके अमोघदृष्टि आउ अद्भुत कृति सर्वथा स्तुत्य है ।
सतयुगके अपेक्षा त्रेतामे, त्रेताके अपेक्षा द्वापरमे आउ द्वापरके अपेक्षा कलिमे मनुष्यके प्रज्ञाशक्ति आउ प्राणशक्ति एवं धर्म आउ आध्यात्मके ह्रास सुनिश्चित है । एही कारण है कि कृतयुगमे शिवावतार भगवान् दक्षिणामूर्ति खाली मौन व्याख्यानसे शिष्यके संशयके निवारण कैलन । त्रेतामे गुरु दत्तात्रेय जिनका ब्रह्मा, विष्णु आउ महेश भगवान् द्वारा ज्ञान प्रदान कैल गेलै हल, ऊ सूत्रात्मक वाक्य द्वारा अनुगतके उद्धार कैलन । द्वापरमे नारायणावतार भगवान् कृष्णद्वैपायन वेदव्यास वेदके विभाग करके महाभारत आउ पुराणादिके एवं ब्रह्मसूत्रके संरचना करके एवं शुक, लोमहर्षण आदि कथाव्यासके प्रशिक्षित करके धर्म आउ आध्यात्मके उज्जीवित रखलन । कलियुगमे भगवत्पाद श्रीमद् शङ्कराचार्य भाष्य, प्रकरण आउ स्तोत्रग्रन्थके संरचना करके, विधर्मी पन्थायी एवं मीमांसकादिसे शास्त्रार्थ, परकाय प्रवेश करके, नारदकुण्डसे अर्चाविग्रह श्रीबदरीनाथ एवं भूगर्भसे अर्चाविग्रह श्रीजगन्नाथ दारुब्रह्मके प्रकट करके आउ प्रस्थापित करके, सुधन्वा सार्वभौमके राजसिंहासन समर्पित करके एवं चतुराम्नाय - चतुष्पीठके स्थापना करके अहर्निश अथक परिश्रम द्वारा धर्म आउ अध्यात्मके उज्जीवित आउ प्रतिष्ठित कैलन ।
व्यासपीठके पोषक राजपीठके परिपालक धर्माचार्यके श्रीभगवत्पाद नीतिशास्त्र, कुलाचार आउ श्रौत स्मार्त कर्म, उपासना आउ ज्ञानकाण्डके यथायोग्य प्रचार प्रसारके भावनासे अपन अधिकार क्षेत्रमे परिभ्रमणके उपदेश देलण । ऊ धर्मराज्यके स्थापनाला व्यासपीठ आउ राजपीठमे सद्भावपूर्ण सम्वादके माध्यमसे सामञ्जस्य बनैले रखेके प्रेरणा प्रदान कैलन । ब्रह्मतेज आउ क्षात्रबलके साहचर्यसे सर्वसुमङ्गल कालयोगके सिद्धिके सुनिश्चित मानके कालगर्भित आउ कालातीतदर्शी आचार्य शङ्कर व्यासपीठ आउ राजपीठके शोधन करके दोनोमे सैद्धान्तिक सामञ्जस्य साधलन ।
दशनामी गोस्वामीमे सरस्वती, गिरि, पुरी, वन, योगी, पर्वत, अरण्य, सागर, तीर्थ, आश्रम, भारती उपनाम वाला योगी, गोस्वामी इनकर आध्यात्मिक उत्तराधिकारी मानल जा हथिन आउ उनकर प्रमुख सामाजिक सङ्गठनके नाम "अन्तरराष्ट्रिय जगत्गुरु दशनाम गोस्वामी एकता अखाड़ा परिषद" है । आचार्य शङ्कर पूरा भारतमे मन्दिर आउ शक्तिपीठके पुनः स्थापना कैलन । नील पर्वत पर स्थित चण्डीदेवी मन्दिर इनके द्वारा स्थापित कैलन मानल जा है । शिवालिक पर्वत शृङ्खलाके पहाड़ीके मध्य स्थित माता शाकम्भरी देवी शक्तिपीठमे जाके ई पूजा अर्चना कैलन आउ शाकम्भरी देवीके साथे तीन देवी भीमा, भ्रामरी आउ शताक्षी देवीके प्रतिमाके स्थापित कैलन । कामाक्षी देवी मन्दिरो इनके द्वारा स्थापित है जेकरासे ऊ युगमे धर्मके बढ़ चढ़के प्रसार होलै हल ।
जीवनचरित
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]आचार्य शङ्करके जनम ५०७ ई.स.पू. मे केरलमे कालड़ी अथवा 'काषल' नामक ग्राममे होलै हल । आचार्य शङ्करके पिताके नाम शिवगुरु भट्ट आउ माताके नाम अयम्बा हलै । बड़ी दिन तक सपत्नीक शिवके आराधना करेके अनन्तर शिवगुरु पुत्ररत्न पैलन हल । अतः उनकर नाम शङ्कर रखलन । जखनि ई तीने वर्षके हलन तखनि इनकर पिताके देहान्त हो गेलै । ई बड़ी मेधावी आउ प्रतिभाशाली हलन । ६ वर्षके अवस्थेमे ई प्रकाण्ड पण्डित हो गेलन आउ ८ वर्षके अवस्थामे ई संन्यास ग्रहण कैलन हल । इनकर संन्यास ग्रहण करेके समयके कथा बड़ी विचित्र है । कहल जा है कि माता एकमात्र पुत्रके संन्यासी बनेके आज्ञा न दे हलन । तखनि एक दिन नदी किनारे एगो मकर आचार्य शङ्करके गोड़ पकड़ लेलकै तखनि ई समयके फायदा उठावित आचार्य शङ्कर अपन मातासे कहलन "हमरा सन्यास लेवेके आज्ञा दे न त ई मकर हमरा खा जैतै" । एकरासे भयभीत होके माता तुरत इनका संन्यासी होवेके आज्ञा प्रदान कैलन । आउ आश्चर्य है कि, जैसहीँ माता आज्ञा देलन ओइसहीँ तुरत मकर आचार्य शङ्करके गोड़ छोड़ देलकै आउ ई गोविन्द नाथसे संन्यास ग्रहण कैलन ।[१३]
पहिले ई कुछ दिन तक काशीमे रहलन आउ तखनि ई विजिलबिन्दुके तालवनमे आचार्य मण्डन मिश्रके सपत्नीक शास्त्रार्थमे परास्त कैलन । ई समस्त भारतवर्षमे भ्रमण करके वैदिक धर्मके पुनरुज्जीवित कैलन ।
३२ वर्षके अल्प आयुमे संवत् ४७५ ईपू मे केदारनाथके समीप शिवलोक गमन कर गेलन ।
एकरो देखथिन
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- अद्वैतवाद
- कुमारिल भट्ट
- मण्डन मिश्र
- पद्मपादाचार्य
- शङ्कराचार्य
- मठाम्नाय महानुशासन (आद्य शङ्कराचार्य द्वारा रचित ग्रन्थ जेकरामे मठके सञ्चालनके विधान है ।)
टिप्पणी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ Londhe, Sushama (2008). A Tribute to Hinduism: Thoughts and Wisdom Spanning Continents and Time about India and Her Culture (Hardcover) (Eng मे). Pragun Publication. प॰ 3. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 9788189920661.
Adi Shankaracharya ( 508 - 477 BCE ) was undoubtedly an immortal spiritual leader..
सीएस१ रखरखाव: नामालूम भाषा (link) - ↑ Brahmavadi, Parshuram Thakur (2013-01-01). Vikramshila Ka Itihas: Vikramshila Ka Itihas: The History of Vikramshila University by Parshuram Thakur Brahmavadi (Hindi मे). Prabhat Prakashan. प॰ 150. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-81-7721-218-1.
इतिहासकारों ने आदि शंकराचार्य का समय आठवीं सदी मानकर हिंदी साहित्य के इतिहास को भी अंधकार युग में धकेल दिया है , जबकि बिहार , वैशाली स्थित प्राकृत अनुवादक डॉ . डी . एम . त्रिवेद के एक शिलालेख के अनुसार शंकराचार्य काल ई . पू . 508 , बुद्ध ई . पू . 527 साबित होता है । ' क्रॉनिकल ऑफ नेपाल हिस्टरी , में बुद्ध का काल ई . पू . 1887 ई . पू . तक दरशाया है , यानी बुद्ध 1887 ई . पू . से 1807 ई . पू तक जीवित थे । वहीं आचार्य शंकर की जन्मतिथि ई . पू . 509 का प्रमाण एक जैन अभिलेख में भी मिलता है ।
- ↑ Society, Indian History and Culture (1983). Studies in Religion and Change (English मे). Books & Books. प॰ 73.
Guruparampara - Smritis of Dwaraka and , Govardhana - Puri Peetham too agree with this date of Adi Sankara , i.e. K.E. 2593 corresponding to 508 B.C.
सीएस१ रखरखाव: तिथि और वर्ष (link) - ↑ "Journal of Indian History". Department of Modern Indian History. 57: 225–30. 1979.
- ↑ Kanchi Kamakoti Math, a Myth (English मे). Varanasi Raj Gopal Sharma. 1987. प॰ 64.
Sri Adi Sankar's time ( 508 B.C ) . They claim this plate as their own since the plate mentions the recipient living in a math near Hastishailanatha temple .
- ↑ Chaudhuri, Puspendu (1998). History Revealed by the Rāmāyaṇa Astronomy (English मे). Firma KLM. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-81-7102-097-3.
Shri Vivekananda Choudhury , however , in his aforesaid book proved that Adi Shankara was born on April 22 , Sunday , 508 B.C
- ↑ "Ritual Journeys in South Asia: Constellations and Contestations of Mobility and space". Ritual Journeys in South Asia. Christoph Bergmann. 9. 2019.
- ↑ "Swarajya". Swarajya. T. Sadavisam. 23: 2. 1979.
- ↑ N. Oak, Purushottam; भट्ट, श्री जगमोहन राव (1971). भारतीय इतिहास की भयंकर भूलें ( Some Blunders of Indian Historical Research का हिन्दी अनुवाद ) (Hindi मे). पप॰ 190–207. अभिगमन तिथि 2017-01-25.सीएस१ रखरखाव: तिथि और वर्ष (link)
- ↑ A Religious History of Ancient India, Upto C. 1200 A.D.: Smarta, epic-Pauranika and Tantrika Hinduism, Christianity and Islam (English मे). Śrīrāma Goyala. 1986. प॰ 60.
Adi Sankara was born in 508 or 509 B.C.
- ↑ Age of Buddha, Milinda & Amtiyoka and Yugapurana (Original PDF) (English मे). Kota Venkatachelam. 1956. प॰ 201. अभिगमन तिथि 2020-03-22.
Birth of Adi Sankara 509 BC
- ↑ "Adi Shankaracharya Praktotsav: आश्चर्य से भर देती है आदि शंकराचार्य की वह अद्भुत यात्रा". jagran.
- ↑ "आदि शंकराचार्य के जन्म के बारे में फैला भ्रम, जानिए सचाई". Hindi Webdunia. मूल से 25 जुलाई 2019 के पुरालेखित.
बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- श्री शङ्कर विरचित ब्रह्मसूत्रभाष्य
- श्रीमच्छङ्करभगवत्पूज्यपादविरचितं ब्रह्मसूत्रभाष्यम्
- शङ्कराचार्यके चार मठ
- आदि शङ्कराचार्यके सम्पूर्ण रचना संसार
- Complete Works of Sri Sankaracharya संस्कृतमे - 20 Volumes
- Upanishad Sankara Bhashya with Hindi Translation - Gita Press 1938/mode/2up ऐतरोयोपनिषद, हिन्दी अनुवाद सहित