आर्यभट
| आर्यभट | |
|---|---|
पुणेमे आर्यभटके मूर्ति ४७६-५५० | |
| जन्म | ४७६ कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) पटना, भारत |
| मृत्यु | ५५०(उम्र ७३-७४) |
| उल्लेखनीय काज | {{{notable_works}}} |
आर्यभट (४७६-५५०) प्राचीनभारतके एक महान् ज्योतिषविद् आउ गणितज्ञ हलन । ई आर्यभटीय ग्रन्थके रचना कैलन जेकरामे ज्योतिषशास्त्रके अनेक सिद्धान्तके प्रतिपादन हे ।[१] एही ग्रन्थमे ई अपन जन्मस्थान कुसुमपुर आउ जन्मकाल शक संवत् ३९८ लिखलन हे । बिहारमे वर्तमान पटनाके प्राचीन नाम कुसुमपुर हल किन्तु आर्यभटके कुसुमपुर दक्षिणमे हल, ई अखनि लगभग सिद्ध हो गेलहे ।
एक अन्य मान्यताके अनुसार उनखर जन्म महाराष्ट्रके अश्मक देशमे भेलहल । उनखर वैज्ञानिक कार्यके समादर रजधानियेमे हो सकहलन । अतः ऊ लम्बा यात्रा करके आधुनिक पटनाके समीप कुसुमपुरमे अवस्थित होके राजसान्निध्यमे अपन रचना पूर्ण कैलन । इनखर उत्पत्ति भट्ट ब्रह्मभट्ट ब्राह्मण समुदायमे मानल जाहे ।
आर्यभटके जन्म-स्थान
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]यद्यपि आर्यभटके जन्मके वर्षके आर्यभटीयमे स्पष्ट उल्लेख हे, उनखर जन्मके वास्तविक स्थानके बारेमे विवाद हे । कुछ मानहथ कि ऊ नर्मदा आउ गोदावरीके मध्य स्थित क्षेत्रमे पैदा भेलन हल, जेकरा अश्मक के रूपमे जानल जाहल आउ ऊ अश्माकाके पहचान मध्यभारतसे करहथ जेकरामे महाराष्ट्र आउ मध्यप्रदेश सम्मिलित हे, हालाँकि आरम्भिक बौद्धग्रन्थ अश्माकाके दक्षिणमे, दक्षिणापथ या दक्खनके रूपमे वर्णित करहथ, जखनिकि अन्य ग्रन्थ वर्णित करहथ कि अश्माकाके लोग सिकन्दरसे लड़लन होत, ई हिसाबसे अश्माकाके उत्तर दन्ने आउ आगे होवेके चाही । [२]
एक ताजा अध्ययनके अनुसार आर्यभट, केरलके चाम्रवत्तम (१०उत्तर५१, ७५पूर्व४५) के निवासी हलन । अध्ययनके अनुसार अस्मका एक जैनप्रदेश हल जेकि श्रवणबेलगोलाके चारो दन्ने फैलल हल आउ हियाँके पत्थरके खम्बाके कारण एकर नाम अस्मका पड़ल । चाम्रवत्तम ई जैन बस्तीके भाग हल, एकर प्रमाण हे भारतापुझा नदी जेकर नाम जैनके पौराणिक राजा भारताके नाम पर रखल गेलहे । आर्यभटो युगके परिभाषित करैत बखत राजा भारताके उल्लेख कैलन हे- दसगीतिकाके पचमा छन्दमे राजा भारतके समय तक बीत चुकल कालके वर्णन आवहे । ऊ दिनमे कुसुमपुरामे एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय हल जन्ने जैनके निर्णायक प्रभाव हल आउ आर्यभटके काम ई प्रकार कुसुमपुरा पहुँच सकलन आउ ओकरा पसन्दो कैल गेल ।[३]
हालाँकि ई बात बड्डी हदतक निश्चित हे कि ऊ कौनो न कौनो समय कुसुमपुरा उच्चशिक्षा लागि गेलन हल आउ कुछ समयला ओहौँ रहलन हल ।[४] भास्कर १ (६२९ ई) कुसुमपुराके पहचान पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) के रूपमे कैलन हे । गुप्त साम्राज्यके अन्तिम दिनमे ऊ ओहाँ रहल करहलन । ऊ ओह समय हल जेकरा भारतके स्वर्णिम युगके रूपमे जानल जाहे, विष्णुगुप्तके पूर्व बुद्धगुप्त आउ कुछ छोट राजाके साम्राज्य खन्नि उत्तरपूर्वमे हूणके आक्रमण शुरू हो गेलहल ।
आर्यभट अपन खगोलीय प्रणालीला सन्दर्भके रूपमे श्रीलङ्काके प्रयोग करहलन आउ आर्यभटीयमे अनेक अवसर पर [[श्रीलङ्का]के उल्लेख कैलन हे ।[तथ्य वान्छित]
इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ "अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के योगदान को समर्पित है बिहार की यह जगह". मूलसे 28 जुलाई 2017 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 जुलाई 2017.
- ↑ Ansari, S. M. R. (1977). "Aryabhata I, His Life and His Contributions". Bulletin of the Astronomical Society of India. 5 (1): 10–18. मूलसे 16 नवंबर 2007 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 21 जुलाई 2007. नामालूम प्राचल
|month=के उपेक्षा कैल गेल (सहायता);|archive-date=में तिथि प्राचल का मान जाँची (सहायता) - ↑ [5] ^ आर्यभट की कथित गलती- उनके पर्येवेक्षण के स्थान पर प्रकाश, वर्त्तमान विज्ञान, ग्रन्थ .९३, १२, २५ दिसम्बर २००७, पीपी १८७० -७३.
- ↑ Cooke (1997). "The Mathematics of the Hindus". प॰ 204.
Aryabhata himself (one of at least two mathematicians bearing that name) lived in the late fifth and the early sixth centuries at Kusumapura (Pataliutra, a village near the city of Patna) and wrote a book called Aryabhatiya.
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