आव्यूह
| आव्यूह |
|---|
| प्रकार |
| पङ्क्ति आव्यूह • वर्ग आव्यूह • विकर्ण आव्यूह • तत्समक आव्यूह • त्रिभुजीय आव्यूह |
| गुण |
| योज्य तत्समक • योज्य प्रतिलोम |

गणितमे आव्यूह (Matrix, मेट्रिक्स) एक अदिश राशिसे निर्मित आयताकार रचना हे । ई आयताकार रचना लघु कोष्ठक "()", दोहरा दण्ड "|| ||" अथवा दीर्घ कोष्ठक "[ ]" के भीतरे बन्द होवहे । एकरामे सङ्ख्याके एक विशेष प्रकारके विन्यास कैल जाहे, अतः एकरा आव्यूह, या मेट्रिक्सके सञ्ज्ञा देल गेल हे । मेट्रिक्सके अवयव सङ्ख्या होवहे किन्तु ई ऐसन कौनो अमूर्त वस्तु हो सकहे जेकर गुणा कैल जा सके एवं जेकरा जोड़ल जा सके ।
परिभाषा
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सर्वप्रथम सिल्वेस्टर (१८५० ई) आव्यूहके ई परिभाषा देलन हल कि सङ्ख्याके कौनो आयताकार या वर्गाकार सरणीके, जेकरामे से सारणिक (determinants) बन सके, आव्यूह कहल जाहे । आधुनिक समयमे आव्यूहके एक अतिसम्मिश्र (hypercomplex) सङ्ख्याके रूपमे मानहथ । ई दृष्टिकोणके प्रवर्तक हथ मिल्टन (१८५३ ई) आउ केली (१८५८ ई) ।[१]
आकार
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]| नाम
=!:'[light Color. Green'green:light ] | ! आकार | उदाहरण | विवरण |
|---|---|---|---|
| पङ्क्ति आव्यूह | 1 × n | एकरामे ऐसन आव्यूह आवहे, जेकरामे खाली एके पङ्क्ति होवहे । | |
| स्तम्भ आव्यूह | n × 1 | एकरामे ऐसन आव्यूह आवहे, जेकरामे खाली एके स्तम्भ होवहे । | |
| वर्ग आव्यूह | n × n | एकरामे ऐसन आव्यूह आवहे, जेकरामे एकसे अधिक पङ्क्ति आउ स्तम्भ होवहे । अथवा एकरामे स्तम्भ एवं पङ्क्तिके सङ्ख्या समान होवहे । एकरा कुछ स्थितिमे अदिश आव्यूह, शून्य आव्यूह त्रिभुजीय आव्यूहो कहल जाहे । |
सङ्केत चिन्ह
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]कौनो आव्यूहके लिखैत खन्नि ओकरा कोष्ठकमे लिखल जाहे ।
मुख्यतः आव्यूहके "A" से दर्शावल जाहे । ओहैँ a11 या a1,1 से पङ्क्ति आउ स्तम्भके मानके देखावल जाहे । ऊपरे देल उदाहरणमे a11 पहिल पङ्क्तिमे आउ पहिल स्तम्भमे हे । ई कारण एकरा 1,1 लिखके दर्शावल गेलहे । ओहैँ एही प्रकारसे a12 या a1,2 पहिल पङ्क्तिमे हे आउ दोसर स्तम्भमे हे । दोसर स्तम्भमे होवेके कारण अन्तमे 2 लिखल हे । पङ्क्तिके सभ मानके m आउ स्तम्भके सभ मानके n से दर्शावल जाहे ।
रैखिक परिवर्तन
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]| क्षैतिज कतरनी m=1.25. | क्षैतिज व्यवस्था | दबाव मानचित्रण r=3/2 | प्रक्षेपित 3/2 | परिक्रमण π/6R = 30° |
इतिहास
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]आव्यूहके बड्डी लम्बा इतिहास हे, किन्तु रेखीय गणना लागि एकर प्रयोग वर्ष १८०० के बादे शुरू हो पाएल । चीनी पाठ्य "गणित कलाके नौ अध्याय" दोसरी शताब्दीमे लिखल एकर पहिला उदाहरण हल । जेकरामे एकरा एक प्रकारके व्यूह संरचनाके रूपमे हल कैल गेलहल । एकर बाद वर्ष १५४५ मे इतालीके गणितज्ञ गिरोलामो कार्डनो ई विधिके चीनसे लेके यूरोपमे अर्स मेग्ना के नामसे प्रकाशित कैलक ।[२] जापानके गणितज्ञ सेकियो ई प्रकारके विधिसे वर्ष १६८३ मे ढेर गणितीय समीकरण हल कैलन ।[३] एकर बाद डच गणितज्ञ जेन डे विट्ट एकर एक परिवर्तित रूप १६५९ मे एक पुस्तकमे प्रकाशित कैलन ।[४]
इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ Anton, Howard (1987), Elementary Linear Algebra (5th ed.), New York: Wiley, ISBN 0-471-84819-0
- ↑ Discrete Mathematics 4th Ed. Dossey, Otto, Spense, Vanden Eynden, Published by Addison Wesley, October 10, 2001 ISBN 978-0321079121 | p.564-565
- ↑ Science and Civilisation in China. Vol. III. केम्ब्रिज: केंब्रिज विवि. 1959. p. 117. ISBN 9780521058018. Archived from the original on 18 जनवरी 2017. Retrieved 12 दिसम्बर 2015.
{{cite book}}: ISBN / Date incompatibility (help) - ↑ Discrete Mathematics 4th Ed. Dossey, Otto, Spense, Vanden Eynden, Published by Addison Wesley, October 10, 2001 ISBN 978-0321079121 | p.564
बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- आव्युह वियोजन (matrix decomposition) (गणिताञ्जलि)