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कालरात्रि

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कालरात्रि
सिद्धि
कालरात्रि- नवदुर्गामे सप्तम
देवनागरीकालरात्रि
सम्बन्धहिन्दु देवी
अस्त्रतलवार
जीवनसङ्गीशिव
सवारीगधा

माँ दुर्गाके सतमा शक्ति कालरात्रिके नामसे जानल जा हथिन ।[१] दुर्गा पूजाके सतवमा दिन माँ कालरात्रिके उपासनाके विधान है । ई दिन साधकके मन 'सहस्रार' चक्रमे स्थित रहऽ है । एकरा ला ब्रह्माण्डके समस्त सिद्धिके द्वार खुले लगऽ है । देवी कालरात्रिके व्यापक रूपसे माता देवी - काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुण्डा, चण्डी आउ दुर्गाके ढेर विनाशकारी रूपमे से एक मानल जा है । रौद्री, धूम्रवर्णा कालरात्रि माँके अन्य कम प्रसिद्ध नाममे है ।

ई ध्यान रखल जरूरी है कि माँ काली आउ कालरात्रिके प्रयोग एक दोसराके परिपूरक है, हालाँकि ई दु देवीके कुछ लोग द्वारा अलगे-अलगे सत्ताके रूपमे मानल गेलै हे । डेविड किन्स्लेके अनुसार कालीके उल्लेख हिन्दुधर्ममे लगभग ६०० ईसाके आसपास एक अलगे देवीके रूपमे कैल गेलै हे । कालानुक्रमिक रूपसे कालरात्रि महाभारतमे वर्णित (लगभग ३२०० ईसा पूर्व) वर्तमान कालिएके वर्णन है ।[२]

मानल जा है कि देवीके ई रूपमे सब राक्षस, भूत, प्रेत, पिशाच आउ नकारात्मक ऊर्जाके नाश होवऽ है, जे उनकर आगमनसे पलायन करऽ है ।

शिल्प प्रकाशमे सन्दर्भित एक प्राचीन तान्त्रिक पाठ, सौधिकागम, देवी कालरात्रिके वर्णन रात्रिके नियन्त्रा रूपमे कैल गेलै हे । सहस्रार चक्रमे स्थित साधकके मन पूर्णतः माँ कालरात्रिके स्वरूपमे अवस्थित रहऽ है । उनकर साक्षात्कारसे मिले वाला पुण्य (सिद्धि आउ निधि विशेष रूपसे ज्ञान, शक्ति आउ धन) के ऊ भागी हो जा है । ओकर समस्त पाप-विघ्नके नाश हो जा है आउ अक्षय पुण्य-लोकके प्राप्ति होवऽ है ।

  1. ↑ "9 days, 9 avatars: Be ferocious like Goddess Kaalratri". Archived from the original on 15 जून 2017. Retrieved 27 सितम्बर 2017.
  2. ↑    मिश्रा, पी.के. (१९८९-०१-०१ ) संस्कृति, जनजातीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन: डॉ एन के साहू स्मारक वॉल्यूम अगम कला प्रकाशन