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काल्पनिक सङ्ख्या

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(नील रङ्गसे छायाङ्कित
प्रतिरूपके पुनराव

र्ती)


(मॉड्युलर देखी)

एक काल्पनिक सङ्ख्या एक सङ्ख्या हे जेकरा वास्तविक सङ्ख्याके काल्पनिक इकाई गुणाके रूपमे लिखल जाहे, जे एकर गुणधर्म द्वारा परिभाषित कैलक हे ।[] एक काल्पनिक सङ्ख्याके वर्ग शून्य अथवा ऋणात्मक होवहे । उदाहरणला एक काल्पनिक सङ्ख्या हे जेकर वर्ग हे ।

काल्पनिक सङ्ख्या के एक वास्तविक सङ्ख्या मे जोड़ेपर समिश्र सङ्ख्या प्राप्त होवहे, जन्ने आउ सम्मिश्र सङ्ख्याके क्रमशः वास्तविक भाग आउ काल्पनिक भाग हे । अतः काल्पनिक सङ्ख्या ऊ सम्मिश्र सङ्ख्योके कहल जा सकहे जेकर वास्तविक भाग शून्य हे ।

सम्मिश्र तलके एक उदाहरण । काल्पनिक सङ्ख्या उर्ध्व निर्देशाङ्क अक्ष पर रखल जाहे ।

यद्यपि यूनानी गणितज्ञ आउ अभियन्ता अलेक्जेण्ड्रियाके हीरो सर्वप्रथम ई सङ्ख्या प्राप्त करेमे सफलता प्राप्त कैलन,[][]। काल्पनिक सङ्ख्याके व्यापक रूपसे स्वीकृति आइलर (1707–1783) आउ गौस (1777–1855) के कार्यके भेटल । सम्मिश्र सङ्ख्याके समतलके बिन्दु द्वारा ज्यामितिय सार्थकता सर्वप्रथम केस्पर वेस्सेल (1745–1818) वर्णित कैलन ।[]

सम्मिश्र तलमे ९०-डिग्री घूर्णन

ज्यामितीय रूपसे काल्पनिक सङ्ख्या सम्मिश्र तलके उर्ध्व अक्ष पर रखल जाहे ।

काल्पनिक सङ्ख्याके अनुप्रयोग

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काल्पनिक सङ्ख्याके महत्व सम्मिश्र सङ्ख्यासे अवास्तविक सङ्ख्याके निर्माणसे आरम्भ होवहे जे वैज्ञानिक आउ सम्बन्धित क्षेत्र जैसे सङ्केत प्रसंस्करण, नियन्त्रण सिद्धान्त, विद्युतचुम्बकत्व, तरल गतिकी, प्रमात्रा यान्त्रिकी, मानचित्रकला आउ स्पन्दन विश्लेषणला आवश्यक सामग्री हे ।

ऋणात्मक सङ्ख्याके वर्गमूलके गुणलफलके ध्यानपूर्वक करेके चाही । उदाहरणला[] निम्न विधि गलत हे:

तर्कदोष ई है कि गणितमे , लिखल जाहे जन्ने वर्गमूलके मुख्य मान दृष्टान्त तखनि होवहे जखनि x आउ y दुनो सङ्ख्यामे से कमसे कम एक सङ्ख्या धनात्मक हे, हियाँ ई स्थिति नै हे ।

  1. उनो इन्गार्ड, के॰ (1988), तरङ्ग आउ दोलनके मूल्तत्व (Fundamentals of waves & oscillations), कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, p. 38, ISBN 0-521-33957-X, archived from the original on 31 दिसम्बर 2013, retrieved 14 जून 2013, Chapter 2, p 38
    Archived २०१३-१२-३१ at the वेबैक मशीन
  2. Hargittai, István (1992). Fivefold symmetry (2nd ed.). World Scientific. p. 153. ISBN 981-02-0600-3. Archived from the original on 3 जनवरी 2014. Retrieved 14 जून 2013., Extract of page 153
    Archived २०१४-०१-०३ at the वेबैक मशीन
  3. Roy, Stephen Campbell (2007). Complex numbers: lattice simulation and zeta function applications. Horwood. p. 1. ISBN 1-904275-25-7. Archived from the original on 3 जनवरी 2014. Retrieved 14 जून 2013.
  4. रॉजेनफेल्ड, बोरिस अब्रामॉविक (1988). A history of non-euclidean geometry: evolution of the concept of a geometric space. स्प्रिङ्गर. p. 382. ISBN 0-387-96458-4. Archived from the original on 27 मई 2012. Retrieved 14 जून 2013., Chapter 10, page 382
    Archived २०१४-०७-०५ at the वेबैक मशीन
  5. मैक्सवेल, ई॰ए॰ (1959), गणित में तर्कदोष (Fallacies in mathematics), केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, MR 0099907. पाठ VI, §I.2