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कुरुक्षेत्र युद्ध

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महाभारतके युद्ध

महाभारत महाकाव्यके हस्तलिखित पाण्डुलिपि, चित्र सहित
तिथि १०५० ईपू
स्थान कुरुक्षेत्र, वर्तमान हरियाणा राज्य
परिणाम कौरवके पराजय, पाण्डवके सत्ता प्राप्त
योद्धा
पाण्डवके सेनापति धृष्टद्युम्न कौरवके सेनापति भीष्म
सेनानायक
धृष्टद्युम्न † भीष्म †,द्रोण †,कर्ण †,
शल्य †,अश्वत्थामा
शक्ति/क्षमता
७ अक्षौहिणी
१५,३०,९०० सैनिक
११ अक्षौहिणी
२४,०५,७०० सैनिक
मृत्यु आउ हानि
सब योद्धामेसे
खाली आठे ज्ञात वीर बचलन - पाँच पाण्डव, कृष्ण, सात्यकि, युयुत्सु
सब योद्धामे से
खाली तीने ज्ञात वीर शेष
-अश्वत्थामा, कृपाचार्य, कृतवर्मा

कुरुक्षेत्र युद्ध कौरव आउ पाण्डवके मध्य कुरु साम्राज्यके सिंहासनके प्राप्तिला लड़ल गेलै हल । महाभारतके अनुसार ई युद्धमे भारतवर्षके प्रायः सब जनपद भाग लेलकै हल । महाभारत आउ अन्य वैदिक साहित्यके अनुसार ई प्राचीन भारतमे वैदिक कालके इतिहासके सबसे बड़ युद्ध हलै ।[१] ई युद्धमे लाखो क्षत्रिय योद्धा मारल गेलन जेकर परिणामस्वरूप वैदिक संस्कृति आउ सभ्यताके पतन हो गेलै हल । ई युद्धमे सम्पूर्ण भारतवर्षके राजाके अतिरिक्त बड़ी मनी अन्य देशके वीरो भाग लेलन आउ सबके सब वीर गतिके प्राप्त हो गेलन ।[२] ई युद्धके परिणामस्वरुप भारतमे ज्ञान आउ विज्ञान दुनोके साथे-साथे वीर क्षत्रियके अभाव हो गेलै । एक प्रकारसे वैदिक संस्कृति आउ सभ्यता जे विकासके चरम पर हलै ओकर एकाएक विनाश हो गेलै । प्राचीन भारतके स्वर्णिम वैदिक सभ्यता ई युद्धके समाप्तिके साथहीँ समाप्त हो गेलै । ई महान युद्धके ऊ समयके महान ऋषि आउ दार्शनिक भगवान वेदव्यास अपन महाकाव्य महाभारतमे वर्णन कैलन जे सहस्राब्दी तक सम्पूर्ण भारतवर्षमे गाके एवं सुनके याद रखल गेलै । [३]

युद्धके ऐतिहासिकता विद्वानके चर्चाके विषय बनल है ।[४][५][६] ऋग्वेदमे उल्लिखित दस राजाके लड़ाई कुरुक्षेत्र युद्धके कहानीके मूल आधार बनावल हो सकऽ है । महाभारतके वृत्तान्तमे युद्धके बड़ी विस्तार आउ संशोधन कैल गेलै हल जे एकरा सन्दिग्ध बनावऽ है ।[७] कुरुक्षेत्र युद्धके एक ऐतिहासिक तिथि प्रदान करेके प्रयास कैल गेलै हे जेकरामे अनुसन्धानके सुझाव देल गेलै हे १००० ईपू ।[५] हालाँकि लोकप्रिय परम्पराके दावा है कि युद्ध कलियुगमे सङ्क्रमणके चिह्नित करऽ है जे एकरा ३१०२ ईसा पूर्वसे दिनाङ्कन करऽ है ।[८]

महाभारतमे मुख्यतः चन्द्रवंशीके[उद्धरण चाही]

दु परिवार कौरव आउ पाण्डवके बीच होएल युद्धके वृत्तान्त है । १०० कौरव आउ पाँच पाण्डवके बीच कुरु साम्राज्यके भूमिला जे सङ्घर्ष चललै ओकरासे अन्ततः महाभारत युद्धके सृजन होलै । उक्त युद्धके हरियाणामे स्थित कुरुक्षेत्रके आसपास होएल मानल जा है । ई युद्धमे पाण्डव विजयी होलन हल ।[१] महाभारतमे ई युद्धके धर्मयुद्ध कहल गेलै हे काहेकि ई सत्य आउ न्यायला लड़ल जाए वाला युद्ध हलै ।[२] महाभारत कालसे जुड़ल ढेर अवशेष दिल्लीमे पुराना किलामे मिललै हे । पुराना किलाके पाण्डवके किलो कहल जा है ।[९] कुरुक्षेत्रोमे भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा महाभारत कालके बाण आउ भाला प्राप्त होलै हे ।[१०] गुजरातके पश्चिमी तट पर समुन्दरमे डूबल ७०००-३५०० बरस पुरान नगर खोजल गेलै हे ।[११], जिनको महाभारत में वर्णित द्वारका के सन्दर्भों से जोड़ा गया[१२] एकर इलावा बरनावोमे लाक्षागृहके अवशेष मिललै हे ।[१३] ई सब प्रमाण महाभारतके वास्तविकताके सिद्ध करऽ है ।
कुरुराज्य सभामे द्रौपदीके अपमान

महाभारत युद्ध होवेका मुख्य कारण कौरवके उच्च महत्वाकांक्षा आउ धृतराष्ट्रके पुत्र मोह हलै । कौरव आउ पाण्डव आपसमे चचेरा भाई हलन । वेदव्यासजीसे नियोगके द्वारा विचित्रवीर्यके भार्या अम्बिकाके गर्भसे धृतराष्ट्र आउ अम्बालिकाके गर्भसे पाण्डु उत्पन्न होलन । धृतराष्ट्रके पत्नी गान्धारीके गर्भसे सौ पुत्रके जन्म होलै । ओकरामे दुर्योधन सबसे बड़ हलै । पाण्डुके युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव पाँच पुत्र होलन । धृतराष्ट्र जन्मेसे नेत्रहीन हलन अतः उनकर जगह पर पाण्डुके राज देल गेलै जेकरासे धृतराष्ट्रके सदा पाण्डु आउ उनकर पुत्रसे द्वेष रहे लगलै । ई द्वेष दुर्योधनके रूपमे फलीभूत होलै आउ शकुनि ई आगमे घीके काम कैलकै । शकुनिके कहे पर दुर्योधन बचपनसे लेके लाक्षागृह तक ढेर षडयन्त्र कैलक । किन्तु हर बार ऊ विफल रहलै । युवावस्थामे आवे पर जखनि युधिष्ठिरके युवराज बना देल गेलै त ऊ उनका लाक्षागृह भेजवाके मारेके प्रयास कैलकै किन्तु पाण्डव बच निकललन । पाण्डवके अनुपस्थितिमे धृतराष्ट्र दुर्योधनके युवराज बना देलन किन्तु जखनि पाण्डव वापिस आके अपन राज्य वापिस माङ्गलन त उनका राज्यके नाम पर खण्डहर रुपी खाण्डव वन देल गेलै ।

धृतराष्ट्रके अनुरोध पर गृहयुद्धके सङ्कटसे बचेला युधिष्ठिर ई प्रस्तावो स्वीकार कर लेलन । पाण्डव श्रीकृष्णके सहयोगसे इन्द्रके अमरावती पुरी जेतना भव्य नगरी इन्द्रप्रस्थके निर्माण कैलन । पाण्डव विश्वविजय करके प्रचुर मात्रामे रत्न एवं धन एकत्रित कैलन आउ राजसूय यज्ञ कैलन । दुर्योधन पाण्डवके उन्नति देख न पौलकै आउ शकुनिके सहयोगसे द्यूतमे छ्लसे युधिष्ठिरसे उनकर सब राज्य जीत लेलकै आउ कुरु राज्य सभामे द्रौपदीके निर्वस्त्र करेके प्रयास करके उनका अपमानित कैलकै । सम्भवतः एही दिन महाभारतके युद्धके खाद पड़ गेलै हल । अन्ततः पुनः द्यूतमे हारके पाण्डवके १२ वर्षोके ज्ञातवास आउ १ वर्षके अज्ञातवास स्वीकार करे पड़लै । किन्तु जखनि ई शर्त पूरा करहुँ पर कौरव पाण्डवके उनकर राज्य देवेसे मना कर देलकै त पाण्डवके युद्ध करेला बाधित होवे पड़लै किन्तु श्रीकृष्ण युद्ध रोकेके हर सम्भव प्रयास करेके सुझाव देलन ।

महाभारत युद्धमे श्रीकृष्ण आउ अर्जुन

तखनि श्रीकृष्ण पाण्डव दनेसे कुरुराज्य सभामे शान्तिदूत बनके गेलन आउ ओहाँ श्रीकृष्ण दुर्योधनसे पाण्डवके खाली पाँच गाँव देके युद्ध टालेके प्रस्ताव रखलन । किन्तु जखधि दुर्योधन पाण्डवके सुईके नोक जेतनो भूमि देवेसे मना कर देलकै त अन्ततः युधिष्ठिरके युद्ध करेला बाधित होवे पड़लै । ई प्रकार कौरव ११ अक्षौहिणी आउ पाण्डव ७ अक्षौहिणी सेना एकत्रित कर लेलन । युद्धके तैयारी पुरा करेके बाद कौरव आउ पाण्डव दुनो दल कुरुक्षेत्र पहुँचलन जने ई भयङ्कर युद्ध लड़ल गेलै [१४] कुरुक्षेत्रके ऊ भयानक आउ घमासान संहारक युद्धके अनुमान महाभारतके भीष्म पर्वमे देल एक श्लोकसे [१५] लगावल जा सक है कि

“ न पुत्रः पितरं जज्ञे पिता वा पुत्रमौरसम् ।

भ्राता भ्रातरं तत्र स्वस्रीयं न च मातुलः ॥

„
“ अर्थात् : ऊ युद्धमे न पुत्र पिताके, न पिता पुत्रके, न भाई भाईके, न मामा भाञ्जाके, न मित्र मित्रके चिन्हऽ हलै' „
  1. 1 2 महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर,सौप्तिकपर्व
  2. 1 2 महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर,भीष्मपर्व
  3. ↑ महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर, आदिपर्व, प्रथम अध्याय
  4. ↑ Singh, Upinder (2006). Delhi: Ancient History. Berghahn Books. p. 85. ISBN 9788187358299.
  5. 1 2 Singh 2009, पृ॰ 19.
  6. ↑ Insoll, Timothy. Case Studies in Archaeology and World Religion: The Proceedings of the Cambridge Conference. Archaeopress. p. 166.
  7. ↑ Murthy, S. S. N. (8 सितम्बर 2016). "The Questionable Historicity of the Mahabharata". Electronic Journal of Vedic Studies. 10 (5): 1–15. doi:10.11588/ejvs.2003.5.782. ISSN 1084-7561. Archived from the original on 26 जनवरी 2019. Retrieved 26 जनवरी 2019.
  8. ↑ The Mahabharata: Volume 1, Volume 1. Penguin UK. 2015. ISBN 9788184753882.
  9. ↑ "दिल्ली सिटी द इमपेरिकल गजेटटियर ऑफ इण्डिया,१९०९, भाग ११, पेज २३६". Archived from the original on 3 मार्च 2016. Retrieved 11 मई 2010.
  10. ↑ "आरकेलोजी ऑनलाइन, साइन्टिफिक वेरिफिकेशन ऑफ वैदिक नोलेज, कुरुक्षेत्र". Archived from the original on 26 मार्च 2010. Retrieved 11 मई 2010.
  11. ↑ "आई एस डॉट कॉम, आरटिकल २९". Archived from the original on 15 फ़रवरी 2010. Retrieved 11 मई 2010. {{cite web}}: Check date values in: |archive-date= (help)
  12. ↑ "आरकेलोजी ऑनलाइन, साइन्टिफिक वेरिफिकेशन ऑफ वैदिक नोलेज, ऐविडेन्स फार ऐन्शियन्ट पोर्ट सिटी ऑफ द्वारका". Archived from the original on 26 मार्च 2010. Retrieved 11 मई 2010.
  13. ↑ "लाक्षागृह". Archived from the original on 10 अप्रैल 2009. Retrieved 11 मई 2010.
  14. ↑ महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर
  15. ↑ महाभारत गीताप्रेस गोरखपुर, भीष्म पर्व-४६.१

Archived २००६-०२-१७ at the वेबैक मशीन - इन्दिरा गान्धी राष्ट्रीय कला केन्द्र

Archived २००८-०४-०८ at the वेबैक मशीन - एहाँ सम्पूर्ण वैदिक साहित्य संस्कृतमे उपलब्ध है ।