गणेश
| श्री गणेश | |
|---|---|
| नव आरम्भ, समृद्धि, बुद्धि आउ सफलताके देवता आउ जीवनसे बाधाके दूर करेवाला भगवान् | |
| अन्यनाम | गणपति, बिनायक, गजानन, गणेश्वर, गौरीनन्दन, गौरीपुत्र, श्री गणेश, गणधिपति, सिद्धिविनायक, अष्टविनायक, बुद्धिपति, शुभकर्ता, सुखकर्ता, विघ्नहर्ता,महागणपति । abodes=गणेशलोक आउ कैलाश पर्बत |
| मन्त्र | ॐ वक्रतुण्डाय विद्महे एकदन्ताय धिमहि तन्नो द दन्ती प्रचोद्यात । , वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वे कार्येषुसर्वदा: |
| अस्त्र | त्रिशूल, तलवार, अङ्कुश, पाश आउ परशु |
| प्रतीक | स्वास्तिक आउ मोदक |
| दिवस | बुधवार |
| जीवनसङ्गी | रिद्धि आउ सिद्धि |
| माता-पिता | शिव - पार्वती |
| भाई-बहिन | भगवान् कार्तिकेय (बड़ भाई), भगवान् अय्यपा (बड़ भाई) , देवी अशोकसुन्दरी (बड़ बहिन) , देवी ज्योति (बड़ बहिन) आउ मनसा देवी (बड़ बहिन) |
| सन्तान | शुभ (बड़ पुत्र "शुभताके प्रतीक"), लाभ (छोट पुत्र "लाभके प्रतीक"), आउ सन्तोषी माता (पुत्री "सन्तुष्टिके देवी") |
| सवारी | मूषक (मूस) |
| शास्त्र | गणेश पुराण, शिव महापुराण आउ मुद्गल पुराण |
| त्योहार | गणेश चतुर्थी |
गणेश जिनखा गणपति, बिनायक, लम्बोदर आउ पिल्लैयारके नामोसे जानल जाहे, हिन्दु देवतामे सबसे प्रसिद्ध आउ सबसे अधिक पूजल जायेवाला देवतामे से एक हथ । आउ गणपति सम्प्रदायमे सर्वोच्च देवता हथ । उनखर चित्रण पूरा भारतमे पाएल हे । हिन्दु धर्मावलम्बी उनखर पूजा करहथ, चाहे ऊ कौनो सम्प्रदायसे जुड़ल हो, गणेशके भक्ति व्यापक रूपसे फैलल हे ।
भारतीय संस्कृतिमे प्रत्येक कार्य गणेशपूजा बिन अधूरा है । अभ्यास, व्यापार, विवाह, पूजा आदि सब शुभ कार्य आउ अवसरके आरम्भमे सर्वप्रथम गणेशेजीके पूजा करेके प्रावधान होवेके कारण उनका प्रथमपूज्य देवतो कहल जा है । रिद्धि (बुद्धि) आउ सिद्धि गणेशजीके शाश्वत सङ्गिनी हथिन । गणेशजीके शुभ आउ लाभ नमक दु पुत्रो है ।
गणेशजीके अवतार
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]गणेश पुराणके अनुसार श्रीगणेश चार युगमे चार अवतार लेलन । हिन्दुधर्ममे चार युग सत्य (या कृत युग), त्रेता, द्वापर आउ कलियुग है, जे वर्तमान युग है । सतयुगमे गणेश महोत्कटके रूपमे प्रकट होलन; द्वापरयुगमे ऊ मयूरेश्वरके रूपमे प्रकट होलन; त्रेतायुगमे ऊ गजाननके रूपमे अवतार लेलन, आउ कलियुगमे ऊ धूम्रकेतुके रूपमे प्रकट होथिन
महोत्कट (सतयुग)
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सत्ययुगमे गणेश कश्यप आउ अदितिके पुत्र महोत्कटके रूपमे अवतार ले हथिन । महोत्कटके विनायकके नामसे जानल जा है ।
ई रूपमे गणेश दस भुजा वाला हथिन आउ सिंह पर सवार हथिन । ऊ दानव देवान्तक, नरान्तक आउ धूम्राक्ष द्वारा कैल अधर्मके नाश करेला अवतरित होलन हे ।
मयूरेश्वरी (त्रेतायुग)
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]त्रेतायुगमे गणेश मयूरेश्वरके रूपमे अवतरित होलन । ऊ शिव आउ सतीके पुत्र हथिन । ई रूपमे गणेशजीके छौ भुजा है आउ ऊ मोर पर सवार हथिन । ई अवतारके उद्देश्य सिन्धु राक्षसके विनाश कैल हलै ।
गजानन (द्वापर युग)
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]द्वापरयुगमे गणेशजी गजाननके रूपमे अवतरित होलन । ऊ शिवके पुत्र हथिन । ई रूपमे उनकर चार भुजा हलै आउ ऊ मूषकके सवारी करऽ हलथिन । पृथ्वी पर उत्पात मचावे वाला राक्षस सिन्धुरके गजानन वध कैलन हल । वर्तमान समयमे गणेशजीके एही रूपके पूजल जा है ।
धूम्रकेतु (कलियुग)
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]धूम्रवर्णो कहल जा है, हिन्दु भगवान् गणेशके अवतार हथिन जे कलियुगके अन्तमे प्रकट होथिन । गणेश पुराण आउ मुद्गल पुराणमे गणेशके ई अवतारके उल्लेख है जे विष्णुके कल्कि अवतारसे अद्भुत समानता रखऽ है । गणेशके ई अन्तिम अवतार अखनी होएल बाकी है ।
गणेश पुराणमे कहल गेलै हे कि ऊ अभिमानसुर नामक राक्षसके विनाश करेला प्रकट होथिन । प्रतीकात्मक रूपसे ई राक्षस मनुष्यमे अहङ्कार आउ आसक्तिके प्रतीक है ।
ऐसन मानल जा है कि ई गणेशजीके एक उग्ररूप है आउ ऊ नील घोड़ा पर सवार होथिन । ई रूपमे ऊ कलियुगके अन्त करतथिन आउ सृष्टिके अगला चक्रला ब्रह्माण्डके मुक्त करतथिन ।
गणेशजीके विवाह
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]शास्त्रके अनुसार गणेशजीके विवाहो होलै हल इनकर दुगो पत्नी हथिन[१] जिनकर नाम रिद्धि आउ सिद्धि है आउ इनकासे गणेशजीकु दु पुत्र आउ एक पुत्री है जिनकर नाम शुभ आउ लाभ बतावल जा है ।[१] एही कारण है कि शुभ आउ लाभ ई दु शब्द अपनेके अक्सर उनकर मूर्तिके साथे लौकऽ है आउ ई सब जन्म आउ मृत्युमे आवऽ है । गणेशजीके पूजा करेसे खाली सिद्धि प्राप्त होवऽ है किन्तु इनकर भक्तिसे पूर्ण मोक्ष सम्भव न है । गणेशजीके ई दु पुत्रके इलावा एक पुत्रियो हथिन, ऊ सन्तोषी माताके नामसे विख्यात हथिन ।
इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- 1 2 नवभारतटाइम्स.कॉम (2019-08-29). "जानिए क्यों हुए थे गणेशजी के दो विवाह और रिद्धि सिद्धि कैसे बनीं उनकी पत्नी". नवभारत टाइम्स (in Hindi). Retrieved 2020-08-04.
