दशराज्ञ युद्ध
| दशराज्ञ युद्ध दस राजाके युद्ध | |||||||||
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| योद्धा | |||||||||
| तृत्सु (हिन्द-आर्य) | अलीन अनु भृगु (हिन्द-आर्य) भालन दस (दहए) द्रुह्यु (गान्धारी) मत्स्य राज्य (हिन्द-आर्य) परसु (ईरानी) पुरु (हिन्द आर्य) पणि (पर्णि) | ||||||||
| सेनानायक | |||||||||
| सुदास वशिष्ठ |
दस राजा विश्वामित्र | ||||||||
| शक्ति/क्षमता | |||||||||
| अज्ञात (किन्तु विरोधी-पक्ष से कम) | ६,६६६ से अधिक | ||||||||
| मृत्यु आउ हानि | |||||||||
| अज्ञात (किन्तु विरोधी-पक्ष से कम) | ६,६६६ (ऋग्वेद मन्डल ७) | ||||||||
दशराज्ञ युद्ध या दस राजाके युद्ध या दशराजन युद्ध एक युद्ध हलै जेकर उल्लेख ऋग्वेदके सतमा मण्डलमे ७:१८, ७:३३ आउ ७:८३:४-८ मे भेटऽ है । ई युद्धमे एक दने कबीला आउ उनकर मित्रपक्ष समुदाय हलै, जिनकर सलाहकार ऋषि विश्वामित्र हलन । दुसर दने भारत नामक समुदाय हलै, जेकर नेतृत्व तृत्सु नामक कबीलाके राजा सुदास करैत हलथिन आउ जिनकर प्रेरक ऋषि वशिष्ठ हलथिन ।[१] ई युद्धमे सुदासके भारतके विजय होलै आउ उत्तर भारतीय उपमहाद्वीपके आर्य लोग पर उनकर अधिकार बन गेलै । आगे चलके पूरा देशके नामे 'भारत' पड़ गेलै । ढेर इतिहासकारके अनुसार ई वर्णन एक वास्तविके युद्ध पर आधारित हो सकऽ है ।[२][३] ई सम्भव है कि ऋग्वेदमे वर्णित दस राजाके लड़ाई कुरुक्षेत्र युद्धके "कहानीके" नाभिक "बनैलकै होवे, हालाँकि ई महाभारतके खातामे बड़ी विस्तारित आउ संशोधित कैल गेलै हल ।[४] दशराज्ञ युद्ध परुष्णी नदी (वर्तमानमे रावी) के तट पर लड़ल गेलै, जेकरामे भरतके राजा सुदास दस राजाके एक सङ्घके हरौलक । ई सङ्घमे आर्यके प्रमुख जन (अनु, दुह, यदु, पुरू, तुर्वसु) आउ ५ लघु जनजातिके समूह सम्मिलित हलै जेकर पुरोहित विश्वामित्र हलन ।
योद्धा दल
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]ई युद्धके विजयी राजा सुदास तृत्सु नामक समुदायके हल । विरोधी दल ई प्रकार हल:
- अलीन : ई सम्भवतः आधुनिक अफगानिस्तानके नूरिस्तान क्षेत्रसे पूर्वोत्तरमे रहऽ करऽ हलन काहेकि चीनी तीर्थयात्री ह्वेन त्साङ्ग ऊ जगह पर इनकर गृहभूमि होवेके उल्लेख कैलक हल ।[५][६]
- अनु : कुछ इतिहासकारके अनुसार ई कबीला परुष्णि नदी (रावी नदी) क्षेत्रमे बसल हलै ।[७]
- भृगु : ई लोग सम्भवतः प्राचीन कवि भृगुके वंशज हलन । बादमे इनकर सम्बन्ध अथर्व वेदके भृग्व-आङ्गिरस विभागके रचनासे कैल गेलै हे ।
- भालन : कुछ विद्वानके अनुसार ई बोलन दर्राके इलाकामे बसे वाला लोग हलन ।[८]
- मत्स्य : इनकर वरणन खाली ऋग्वेद ७:१८:६ मे होलै हल किन्तु कालान्तरमे इनकर शाल्वके सम्बन्धोमे उल्लेख भेटऽ है ।[९]
- पुरु : ई ऋग्वेद कालके एक महान कबीलियाई परिसङ्घ हलै जेकरा सरस्वती नदीके किनारे बसल बतावल जा है ।
- पणि : ई दानवोके एक श्रेणीके नाम हलै । कालान्तरके स्रोत इनका स्किथी लोगसे सम्बन्धित बतावऽ है ।
एकरो देखथिन
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ Tribal Fusion and Social Evolution, Sushant Kumar, pp. 21, Strategic Book Publishing, 2000, ISBN 9781606930359, ... The Bharats invaded them under the leadership of king Sudas and thus the ten- kings' war started. One more fact should be considered. The Bharat tribe followed the system of kingship while almost all the opposing tribes were republicans ...
- ↑ भारतीय पुरातत्व और प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ, शिव स्वरूप सहाय, पृष्ठ ३५६, मोतीलाल बनारसीदास पब्लिशर, आई एस बी ऍन ९८८८१२०८२०७८४, ... ऋग्वेद के कई 'जन' यहीं रहते थे तथा दशराज्ञ युद्ध भी यहाँ की घटना है।..
- ↑ Indian Sociology Through Ghurye: A Dictionary, S.D. Pillai, pp. 157, Popular Prakashan, 1997, ISBN 9788171548071, ... The Rigvedic battle of the Ten Kings, an important event in the politico-social history of north-western India, must have been fought about 1200 BC ...
- ↑ Murthy, S. S. N. (8 September 2016). "The Questionable Historicity of the Mahabharata". Electronic Journal of Vedic Studies. 10 (5): 1–15. doi:10.11588/ejvs.2003.5.782. ISSN 1084-7561. Archived from the original on 26 जनवरी 2019. Retrieved 26 जनवरी 2019.
- ↑ Macdonell and Keith, Vedic Index, 1912, I, 39.
- ↑ A. A. Macdonell and A. B. Keith (1912). Vedic Index of Names and Subjects, I, 39.
- ↑ Macdonell and Keith, Vedic Index I 22.
- ↑ Macdonell and Keith, Vedic Index.
- ↑ Macdonell and Keith, Vedic Index, 1912, II 122.
- ↑ Macdonell and Keith, Vedic Index. This is based on the evidence of an Assyrian inscription of 844 BC referring to the Persians as Paršu, and the Behistun Inscription of Darius I of Persia referring to Fārs Province (Pārsa) as the area of the Persians. Radhakumud Mookerji (1988). Chandragupta Maurya and His Times (p. 23). Motilal Banarsidass Publ. ISBN 81-208-0405-8.