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दृढ़ पिण्ड

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दृढ़ पिण्डके स्थिति एकर द्रव्यमान केन्द्र आउ अभिविन्यास (कमसे कम छौ प्राचल) से निर्धारित कैल जा हे ।[१]

भौतिक विज्ञानमे दृढ़ पिण्ड ठोसके ऊ आदर्श अवस्थाके कहल जा हे जेकरामे कौनो विरूपण नै होवे । अन्य शब्दमे दृढ़ पिण्डके देल गेल कौनो दु कणके मध्य दूरी समयके साथे नियत रहहे चाहे एकरा पर कौनो बाह्य बल आरोपित कैल जाये ।

दृढ़ पिण्डके स्थिति ओकरामे समाहित सब कणके स्थितिके निरुपित करहे ।

वेग (जेकरा रेखीय वेगो कहल जा हे) आउ कोणीय वेगके मापन निर्देशतन्त्रके सापेक्ष कैल जा हे ।

कोणीय वेगला योजक प्रमेय

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दृढ़ पिण्ड B के निर्देश तन्त्र N मे कोणीय वेग, N, मे दृढ़ पिण्ड D के कोणीय वेग आउ D के सापेक्ष B के कोणीय वेगके जोड़के समान होवहे ।[२]

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  1. ↑ लोरेंजो सेविक्को, ब्रूनो सिकिलिनो (2000). "§2.4.2 रोल पिच याॅ एङ्गल्स (रोल पिच विचलन कोण)". मॉडलिङ्ग एण्ड कण्ट्रोल ऑफ रोबोट मेनीपुलेटोर्स (यन्त्रमानव साधकके प्रतिरूपण एवं सञ्चालन) (2nd ed.). स्प्रिङ्गर. p. 32. ISBN 1-85233-221-2. Archived from the original on 18 जून 2013. Retrieved 7 अप्रैल 2013.
  2. ↑ केन, थोमस; लेविन्सन, डेविड (1996). "२-४ सहायक सन्दर्भ तन्त्र". डायनेमिक्स ऑनलाइन. सनीवेल, केलिफोर्निया: डायनेमिक्स ऑनलाइन, Inc.