दृढ़ पिण्ड
स्वरूप
| मुख्य शृङ्खला |
| चिरसम्मत बलविज्ञान |
|---|

भौतिक विज्ञानमे दृढ़ पिण्ड ठोसके ऊ आदर्श अवस्थाके कहल जा हे जेकरामे कौनो विरूपण नै होवे । अन्य शब्दमे दृढ़ पिण्डके देल गेल कौनो दु कणके मध्य दूरी समयके साथे नियत रहहे चाहे एकरा पर कौनो बाह्य बल आरोपित कैल जाये ।
शुद्धगतिकी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]रेखीक आउ कोणीय स्थिति
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]दृढ़ पिण्डके स्थिति ओकरामे समाहित सब कणके स्थितिके निरुपित करहे ।
रेखीक आउ कोणीय वेग
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]वेग (जेकरा रेखीय वेगो कहल जा हे) आउ कोणीय वेगके मापन निर्देशतन्त्रके सापेक्ष कैल जा हे ।
गतिकी समीकरण
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]कोणीय वेगला योजक प्रमेय
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]दृढ़ पिण्ड B के निर्देश तन्त्र N मे कोणीय वेग, N, मे दृढ़ पिण्ड D के कोणीय वेग आउ D के सापेक्ष B के कोणीय वेगके जोड़के समान होवहे ।[२]
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एहु देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ लोरेंजो सेविक्को, ब्रूनो सिकिलिनो (2000). "§2.4.2 रोल पिच याॅ एङ्गल्स (रोल पिच विचलन कोण)". मॉडलिङ्ग एण्ड कण्ट्रोल ऑफ रोबोट मेनीपुलेटोर्स (यन्त्रमानव साधकके प्रतिरूपण एवं सञ्चालन) (2nd ed.). स्प्रिङ्गर. p. 32. ISBN 1-85233-221-2. Archived from the original on 18 जून 2013. Retrieved 7 अप्रैल 2013.
- ↑ केन, थोमस; लेविन्सन, डेविड (1996). "२-४ सहायक सन्दर्भ तन्त्र". डायनेमिक्स ऑनलाइन. सनीवेल, केलिफोर्निया: डायनेमिक्स ऑनलाइन, Inc.