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धातु

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धातु - मानव सभ्यताके पूरा इतिहासमे सर्वाधिक प्रयुक्त पदार्थमे धातुओ हे
लुहार द्वारा धातुके गरम करेपर

रसायनशास्त्रके अनुसार धातुतत्व हे जे सरलतासे इलेक्ट्रान त्यागके धनायन बनावहे आउ धातुके परमाणुके साथे धात्विक बन्ध बनावहे । इलेक्ट्रानिक मॉडलके आधार पर धातु इलेक्ट्रान द्वारा आच्छादित धनायनके एक लैटिस हे, या ऊ तत्व जेकरामे चमक होवे, आघातवर्धक गुण होवे एवं जेकर तनन क्षमता अधिक होवे आउ जे उष्मा एवं विद्युतके सुचालक होवे धातु कहला हे ।

धातुके पारम्परिक परिभाषा उनखर बाह्य गुणके आधार पर देल जाहे । सामान्यतः धातु चमकौआ, प्रत्यास्थ, आघातवर्धनीय आउ सुगढ होवहे । धातु उष्मा आउ विद्युतके बेस चालक होवहे जखनकि अधातु सामान्यतः भङ्गुर, चमकहीन आउ विद्युत एवं ऊष्माके कुचालक होवहे ।

रासायनिक तत्वके सर्वप्रथम धातु आउ अधातुमे विभाजित कैल गेल, यद्यपि दुनो समूहके बिल्कुल पृथक्‌ न कैल जा सकहल । धातुके परिभाषा कैल कठिन कार्य हे । मोट रूपसे हमनी कह सकही कि यदि कौनो तत्वमे निम्नलिखित सम्पूर्ण वा कुछ गुण होवे त ओकरा धातु कहब :

(१) चमक,
(२) परान्धता,
(३) साधारण ताप पर ठोस,
(४) स्वच्छ सतह द्वारा प्रकाशके परावर्तनके गुण,
(५) ऊष्मा एवं विद्युत्‌ के उत्तम चालकता, एवं
(६) द्रव अवस्थासे ठण्डा करेपर क्रिस्टल रूपमे ठोस पदार्थके बनल ।

हमनी ई अवश्य कह सकही कि यदि कौनो तत्व विशुद्ध अवस्थामे चमकौआ आउ विद्युत्के चालक न हे, त ऊ अधातु हे । प्रकृतिमे असंयुक्त अवस्थामे बिरली धातुये भेटहे । स्वर्ण, रजत, प्लेटिनम आउ कखनियो-कखनियो ताम्र धातु यदाकदा भेट जाहे । अधिकांश धातुके अयस्क भेट हे जे अधातु (जैसे आक्सीजन, कार्बन, गन्धक आदि) के साथे धातुके यौगिक होवहे । ईसभ यौगिको शुद्ध अवस्थामे न होके अन्य खनिजमे मिश्रित रहहे । ईसभ अयस्कसे विविध रीति द्वारा धातु निकालल जाहे ।