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पाण्डु

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पाण्डु
कश्मीरसे उत्तरार्ध १७मा शताब्दीमे पाण्डु (दहिना) आउ कुन्तीके चित्रकला
कश्मीरसे उत्तरार्ध १७मा शताब्दीमे पाण्डु (दहिना) आउ कुन्तीके चित्रकला
हिन्दु पौराणिक कथाके पात्र
नामपाण्डु
सन्दर्भ ग्रन्थमहाभारत
जन्मस्थलहस्तिनापुर
व्यवसायक्षत्रिय
राजवंशकुरु वंश
माता-पितामहर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास (वास्तविक जैविक पिता), विचित्रवीर्य (आध्यात्मिक पिता), अम्बालिका (माता)
भाई-बहिनधृतराष्ट्र, विदुर
जीवनसङ्गीकुन्ती माद्री
सन्तानयुधिष्ठिर, भीम, अर्जुन,नकुल आउ सहदेव

महाभारतके अनुसार पाण्डु हस्तिनापुरके राजा विचित्रवीर्यके औरस पुत्र आउ महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास आउ अम्बालिकाके पुत्र हलथिन । उनकर जन्म महर्षि वेद व्यासके वरदान स्वरूप होलै हल । ऊ पाण्डवके आध्यात्मिक पिता आउ धृतराष्ट्रके कनिष्ट भ्राता हलथिन । जौन समय हस्तिनापुरके सिंहासन सम्भारेला धृतराष्ट्रके मनोनीत कैल जाइत हलै तखनि विदुर राजनीति ज्ञानके दुहाई देल कि एक नेत्रहीन व्यक्ति राजा न हो सकै, तखनि पाण्डुके नरेश घोषित कैल गेलै ।

एक बेर महाराज पाण्डु अपन दुनो रानियों कुन्ती आउ माद्रीके साथ वन विहार कर रहलन हल । एक दिन ऊ मृगके भ्रममे बाण चला देलन जे एक ऋषिके लग गेलै । ऊ समय ऋषि अपन पत्नीके साथ सहवासरत हलन आउ ओही अवस्थामे उनका बाण लग गेलै । एहीसे ऊ पाण्डुके श्राप दे देलन कि जौन अवस्थामे उनकर मृत्यु हो रहलै हे ओही प्रकार जखनियो पाण्डु अपन पत्नीके साथे सहवासरत होइथिन त उनको मृत्यु हो जैतै । ऊ समय पाण्डुके कौनो सन्तान न हलै आउ ई कारण ऊ विचलित हो गेलन । ई बात ऊ अपन बड़ रानी कुन्तीके बतौलन । तखनि कुन्ती कहलन कि ऋषि दुर्वासा उनका वरदान देलन हल कि ऊ कौनो देवताके आवाहन करके उनकासे सन्तान प्राप्त सकऽ हथिन । तखनि पाण्डुके कहे पर कुन्ती एक-एक करके ढेर देवताके आवाहन कैलन । ई प्रकार माद्रियो देवताके आवाहन कैलन । तखनि कुन्तीके तीन आउ माद्रीके दु पुत्र प्राप्त होलै जेकरामे युधिष्ठिर सबसे ज्येष्ठ हलन । कुन्तीके अन्य पुत्र हलन भीम आउ अर्जुन आउ माद्रीके पुत्र हलन नकुल आउ सहदेव

एक दिन वर्षाऋतुके समय हलै आउ पाण्डु आउ माद्री वनमे विहार कर रहलन हल । ऊ समय पाण्डु अपन काम वेग पर नियन्त्रण न रख सकलन आउ माद्रीके साथे सहवास कैलन । तखनि ऋषिके श्राप महाराज पाण्डुके मृत्युके रूपमे फलित होलै ।