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बालकाण्ड

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राम राक्षस ताटकके वध कैलन

बालकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण आउ गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानसके एक भाग (काण्ड या सोपान) है ।

अयोध्या नगरीमे दशरथ नामके राजा होलन जिनकर कौशल्या, कैकेयी आउ सुमित्रा नामके तीन पत्नी हलन । सन्तान प्राप्तिला अयोध्यापति दशरथ अपन गुरु श्री वशिष्ठके आज्ञासे पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवौलन जेकरा ऋङ्गी ऋषि सम्पन्न कैलन । भक्तिपूर्ण आहुति पाके अग्निदेव प्रसन्न होलन आउ ऊ प्रकट होके राजा दशरथके हविष्यपात्र (खीर, पायस) देलन जेकरा कि ऊ अपन तीनो पत्नीमे बाँट देलन । खीरके सेवनके परिणामस्वरूप कौशल्याके गर्भसे रामके, कैकेयीके गर्भसे भरतके आउ सुमित्राके गर्भसे लक्ष्मण आउ शत्रुघ्नके जनम होलै ।

सीता स्वयंवर (चित्रकार: रवि वर्मा)

राजकुमार सबके बड़ होवे पर आश्रमके राक्षससे रक्षा लागि ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथसे रामऽआउ लक्ष्मणके माङ्ग करके अपना साथे ले गेलन । राम ताड़का आउ सुबाहु नियन राक्षसके मार देलन आउ मारीचके बिन फर वाला बाणसे मारके समुद्रके पार भेज देलन । ओने लक्ष्मण राक्षसके सारी सेनाके संहार कर देलन । धनुषयज्ञला राजा जनकके निमन्त्रण मिले पर विश्वामित्र राम आउ लक्ष्मणके साथे उनकर नगरी मिथिला (जनकपुर) आ गेलन । रस्तामे राम गौतम मुनिके स्त्री अहल्याके उद्धार कैलन । मिथिलामे राजा जनकके पुत्री सीता जिनका जानकियोके नामसे जानल जा है के स्वयंवरोके आयोजन हलै जने जनकप्रतिज्ञाके अनुसार शिवधनुषके तोड़के राम सीतासे बियाह कैलन । राम आउ सीताके बियाहके साथे साथे गुरु वशिष्ठ आउ गुरु विश्वामित्रके परामर्शसे भरतके माण्डवीसे, लक्ष्मणके उर्मिलासे आउ शत्रुघ्नके श्रुतकीर्तिसे बियाह सम्पन्न कैल गेलै ।