बीजगणित
बीजगणित गणितके व्यापक विभागमे से एक हे । सङ्ख्या सिद्धान्त, ज्यामिति आउ विश्लेषण आदि गणितके अन्य बड़ विभाग हे । अपन सबसे सामान्य रूपमे बीजगणित गणितीय प्रतीक आउ ईसभ प्रतीकमे हेरफेर करेके नियमके अध्ययन हे ।[१] बीजगणित लगभग सम्पूर्ण गणितके एक सूत्रमे पिरोवेवाला विषय हे । आरम्भिक समीकरण हल करेसे लेके समूह (ग्रुप्स), रिङ्ग आउ फिल्डके अध्ययन नियन अमूर्त सङ्कल्पनाके अध्ययन आदि अनेकानेक चीज बीजगणितके अन्तर्गत आ जाहे । बीजगणितके प्रगत अमूर्त भागके अमूर्त बीजगणित कहल जाहे ।
गणित, विज्ञान, अभियान्त्रिके नै चिकित्साशास्त्र आउ अर्थशास्त्रोला आरम्भिक बीजगणित अपरिहार्य मानल जाहे । आरम्भिक बीजगणित अङ्कगणितसे ई मामलामे अलगे है कि ई सीधा सङ्ख्याके प्रयोग करेके बजाय उनकर स्थान पर अक्षरके प्रयोग करहे जे या त अज्ञात होवहे या जे अनेक मान धारण कर सकहे ।[२]
बीजगणित चर आउ अचर राशिके समीकरणके हल करे आउ चर राशिके मान निकालेपर आधारित हे । बीजगणितके विकासके फलस्वरूप निर्देशाङ्क ज्यामिति आउ कलनके विकास भेल जेकरासे गणितके उपयोगिता बड्डी बढ़ गेल । एकरासे विज्ञान आउ तकनीकीके विकासके गति भेटल ।
अर्थात् मन्दबुद्धि व्यक्ति गणित (अङ्कगणित) के सहायतासे जे प्रश्न हल नै कर पावहे, ऊ प्रश्न अव्यक्त गणित (बीजगणित) के सहायतासे हल कर सकहे । दोसर शब्दमे बीजगणितसे अङ्कगणितके कठिन समस्याके हल सरल हो जाहे ।
बीजगणितसे साधारणतः तात्पर्य ऊ विज्ञानसे होवहे, जेकरामे सङ्ख्याके अक्षर द्वारा निरूपित कैल जाहे । किन्तु सङ्क्रिया चिह्न ओही रहहे, जिनकर प्रयोग अङ्कगणितमे होवहे । मान ल कि हमनी लिखेला हे कि कौनो आयतके क्षेत्रफल ओकर लम्बाई आउ चौड़ाईके गुणनफलके समान होवहे त हमनी ई तथ्यके निमन प्रकार निरूपित करब —
- क्ष = ल x च
बीजगणितिके आधुनिक सङ्केतवादके विकास कुछ शताब्दी पूर्वे प्रारम्भ भेलहे; किन्तु समीकरणके साधनके समस्या बड्ड पुरान हे । ईसासे २००० वर्ष पहिले लोग अटकल लगाके समीकरणके हल करहलन । ईसासे ३०० वर्ष पहिलेतक हमनीके पूर्वज समीकरणके शब्दमे लिखे लगलन हल आउ ज्यामिति विधि द्वारा उनकर हल ज्ञात कर ले हलन ।
मोटा अर्थमे बीजगणित गणितके ऊ शाखाके कहल जाहे जेकरामे सङ्ख्याके गुण आउ उनकर पारस्परिक सम्बन्धके विवेचन सामान्य प्रतीक द्वारा कैल जाहे । ई प्रतीक अधिकांशतः अक्षर (a, b, c,...,x, y, z) आउ सङ्क्रिया चिह्न (operation signs) (+, -, *,...) आउ सम्बन्धसूचक चिह्न (=, > , <...) होवहे । उदाहरणतः, x2 +3x = 28 के अर्थ हे, 'कौनो ऐसन सङ्ख्या x हे, जेकर वर्गमे यदि ओकर तीन गुना जोड़ देल जाए त फल 28 भेटहे । बीजगणितीय प्रतीक आउ सङ्ख्याके प्रयोग न खाली गणितमे किन्तु विज्ञानके विभिन्न शाखामे होवे लगल हे । व्यापक अर्थमे बीजगणितमे निम्नलिखित विषयके विवेचन सम्मिलित होवहे -
समीकरण (equation), बहुपद (polynomial), वितत भिन्न (continued fraction), श्रेणी (series), सङ्ख्या अनुक्रम (sequence of numbers), सारणिक (determinant), समघात (form), नया प्रकारके सङ्ख्या, जैसे सङ्ख्यायुग्म, मेट्रिक्स ।
बीजगणितके शाखा आउ क्षेत्र
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]आज बीजगणितमे केवल समीकरणेके समावेश नै होवै, एकरामे बहुपद, वितत भिन्न, अनन्त गुणनफल, सङ्ख्या अनुक्रम, समघात या रूप (form), नया प्रकारके सङ्ख्या जैसे सङ्ख्यायुग्म, सारणिक आदि अनेक प्रकरणके अध्ययन कैल जाहे ।
बीजगणितके प्रायः निम्नलिखित श्रेणीमे बाँटल जा सकहे -
- प्रारम्भिक बीजगणित (Elementary algebra) ई प्रायः विद्यालयमे 'बीजगणित' के नामसे पढ़ावल जाहे । विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ावल जायेवाला 'ग्रुप सिद्धान्तो' प्रारम्भिक बीजगणित कहल जा सकहे ।
- अमूर्त बीजगणित (Abstract algebra) - एकरा कहियो-कहियो 'आधुनिक बीजगणितो' कहल जाहे । एकर अन्तर्गत ग्रुप्स, रिङ्ग्स, फिल्ड्स आदि बीजगणितीय संरचना एकर अन्तर्गत आवहे ।
- रैखिक बीजगणित (Linear algebra) - एकरामे सदिश स्पेसके गुणके अध्ययन कैल जाहे । मेट्रिक्सो एकरे अन्तर्गत आवहे ।
- सर्वविषयक बीजगणित (Universal algebra) - एकरामे सभ प्रकारके बीजगणितीय संरचना (algebraic structures) के सर्वनिष्ट (कॉमन) गुणके अध्ययन कैल जाहे ।
- बीजगणितिय सङ्ख्या सिद्धान्त (Algebraic number theory) - एकरामे सङ्ख्याके गुणके अध्ययन बीजगणितीय पद्धतिसे कैल जाहे । सङ्ख्या सिद्धान्ते बीजगणितमे अमूर्तिकरणके बीज बुनलक ।
- बीजगणितीय ज्यामिति (Algebraic geometry) - ई ज्यामितीय समस्या पर अमूर्त बीजगणितके प्रयोग करहे ।
- बीजगणितीय संयोजिकी (Algebraic combinatorics) - एकर अन्तर्गत संयोजिकी (क्रमचय-सञ्चय) के प्रश्नके हलला अमूर्त बीजगणितके प्रयोग कैल जाहे ।
इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ See Herstein
Archived २०२०-०५-०७ at the वेबैक मशीन 1964, page 1: "An algebraic system can be described as a set of objects together with some operations for combining them". - ↑ See Boyer 1991, Europe in the Middle Ages, p. 258: "In the arithmetical theorems in Euclid's Elements VII–IX, numbers had been represented by line segments to which letters had been attached, and the geometric proofs in al-Khwarizmi's Algebra made use of lettered diagrams; but all coefficients in the equations used in the Algebra are specific numbers, whether represented by numerals or written out in words. The idea of generality is implied in al-Khwarizmi's exposition, but he had no scheme for expressing algebraically the general propositions that are so readily available in geometry."
बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- 4000 Years of Algebra
- The Foundations of Algebra – Glimpses (Amartya Kumar Dutta )