ब्रह्मा
| ब्रह्मा | |
|---|---|
| सृष्टिके रचयिता | |
हन्स पर आरूढ़ भगवान् ब्रह्मा | |
| अन्यनाम | बिधाता, स्वयम्भू, चतुरानन आदि |
| सम्बन्ध | हिन्दु देवता |
| निवासस्थान | ब्रह्मलोक |
| मन्त्र | ॐ ब्रह्मणे नमः ।। |
| अस्त्र | देवेया धनुष, ब्रह्मास्त्र, बेद, जपमाला |
| जीवनसङ्गी | सावित्री |
| माता-पिता | श्री विष्णु |
| भाई-बहिन | लक्ष्मी |
| सन्तान | सनकादि ऋषि, नारद मुनि आउ दक्ष प्रजापति आउ सप्तर्षि |
| सवारी | हंस (हंसके नाम हे हंसकुमार) |
| इतिहास · देवता |
| सम्प्रदाय · पूजा · |
| आस्था दर्शन |
|---|
| पुनर्जन्म · मोक्ष |
| कर्म · माया |
| दर्शन · धर्म |
| वेदान्त ·योग |
| शाकाहार शाकम्भरी · आयुर्वेद |
| युग · संस्कार |
| भक्ति {{हिन्दु दर्शन}} |
| ग्रन्थशास्त्र |
| वेद संहिता · वेदाङ्ग |
| ब्राह्मणग्रन्थ · आरण्यक |
| उपनिषद् · श्रीमद्भगवद्गीता |
| रामायण · महाभारत |
| सूत्र · पुराण |
| शिक्षापत्री · वचनामृत |
| सम्बन्धित |
| विश्वमे हिन्दुधर्म |
| गुरु · मन्दिर देवस्थान |
| यज्ञ · मन्त्र |
| हिन्दु पौराणिक कथा · हिन्दुपर्व |
| विग्रह |
| प्रवेशद्वार:हिन्दुधर्म |
| हिन्दु मापनप्रणाली |
ब्रह्मा सनातनधर्मके अनुसार सृजनके देवता हथ । ब्राह्म, पौराणिक कथामे महत्वपूर्ण स्थान रखऽहथिन ।
ई हिन्दु दर्शनशास्त्रके परम सत्यके आध्यात्मिक सङ्कल्पना ब्रह्मन् से अलगे है ।[१][२] ब्रह्मन् लिङ्गहीन हथिन किन्तु ब्रह्मा पुलिङ्ग हथिन ।[१][२] प्राचीन ग्रन्थमे इनकर सम्मान कैल जा है पर इनकर पूजा बड़ी (श्रापके कारण) कम होवऽ है ।[३][४] भारत आउ थाइलैण्डमे इनका पर समर्पित मन्दिर है । राजस्थानके पुष्करके ब्रह्मा मन्दिर[५] [६][७] आउ बैङ्कॉकके इरावन मन्दिर[८][९] एकर उदाहरण है ।
ब्रह्माजीके आयु
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]श्रीमद्भागवतके अनुसार ब्रह्माजीके ५१मा वर्ष चलैत है[१०], १०० वर्ष आयु भगवान् ब्रह्मा के बतावल गेलै हे । संसारमे तीनो देवताके अजर-अमर बतावल गेलै है जबकि वास्तविकता कुछ आउए है, ब्रह्माजी कुल आय (सात करोड़ बीस लाख) चतुर्युग बतावल गेलै हे, ब्रह्माजीके एक दिनमे १४ इन्द्रके शासन काल समाप्त हो जा है । एक इन्द्रके शासन काल बहत्तर चतुर्युगके होवऽ है । एहीसे वास्तवमे ब्रह्माजीके एक दिन (७२ गुणा १४) = १००८ चतुर्युगके होवऽ है आउ एतने रात्रि, किन्तु एकरा एक हजार चतुर्युग मानके चलऽ हथिन । १ महीना = ३० गुणा २००० = ६०००० (साठ हजार) चतुर्युग । १ वर्ष = १२ गुणा ६०००० = ७२०००० (सात लाख बीस हजार) चतुर्युगके । १०० वर्ष = १०० गुण ७२०००० = ७२०००००० (सात करोड़ बीस लाख चतुर्युग) ई प्रकार जखनी ब्रह्माजीके १०० वर्ष पूरा हो जा है तखनी ऊ अपन शरीर छोड़ दे हथिन । ब्रह्माजीके आयु पूरा होवे पर उनकर मृत्यु हो जा है अतः फिर ब्रह्माके पद पर ब्रह्म द्वार कौनो आउके नियुक्त कैल जा है ।

व्युत्पत्ति
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]
हिन्दु त्रिमूर्तिमे भगवान् ब्रह्मा एक्कैस ब्रह्माण्डके स्वामी हथिन । भगवान् ब्रह्मा सृष्टिके तीन गुण सत्व रजस् आउ तमस् मे से रजस् गुण प्रधान है । एही प्रकार, भगवान् विष्णु सतोगुण आउ भगवान् शिव तमोगुण प्रमुख हथिन ।
क्षात्र धर्मके पौराणिक मान्यताके अनुसार ब्रह्मा क्षत्रियके पुत्र हथिन आउ ऊ १० पुत्रके जन्म देलम जिनका मानसपुत्र कहल जा है । भागवत् पुरानके अनुसार ई मानसपुत्र ई है - अत्रि, अङ्गरिस, पुलस्त्य, मरीचि, पुलह, क्रतु, भृगु, वसिष्ठ, दक्ष आउ नारद है । ई सब ऋषिके प्रजापतियो कहल जा है ।
इतिहास
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]वैदिक साहित्य
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]विष्णु आउ शिवके साथे ब्रह्माके सबसे पुरान उल्लेखमे से एक पहिला सहस्राब्दी ईसा पूर्वमे लिखित मैत्रायणी उपनिषद् के पचमा पाठमे है । ब्रह्माके उल्लेख पहिले कुत्सायना स्तोत्र कहलाए जाए वाला छन्द ५.१ मे है । फिर छन्द ५.२ एकर व्याख्या करऽ है ।[११][१२]
सर्वेश्वरवादी कुत्सायना स्तोत्र कहऽ है[११] कि हमनीके आत्मा ब्रह्मन् है आउ ई परम सत्य या ईश्वर सब प्राणीके भीतरे मौजूद है । ई आत्माके ब्रह्मा आउ उनकर अन्य अभिव्यक्तिके साथे ई प्रकार समीकरण करऽ है: तुहे ब्रह्मा हे, तुहे विष्णु हे, तुहे रूद्र (शिव) हे, तुहे अग्नि, वरुण, वायु, इन्द्र हे, तुहे सब हे ।[११][१३]
छन्द ५.२ मे विष्णु आउ शिवके तुलना गुणके सङ्कल्पनासे कैल गेलै हे । ई कहऽ है कि ग्रन्थमे वर्णित गुण, मानस आउ जन्मजात प्रवृत्ति सब प्राणीमे होवऽ है ।[१३][१४] मैत्री उपनिषदके ई अध्याय दावा करऽ है कि ब्रह्माण्ड अन्धकार (तमस) से उभरल है । जे पहिले आवेग (रजस) के रूपमे उभरल हलै पर बादमे पवित्रता आउ अच्छाई (सत्त्व) मे बदल गेलै ।[११][१३] फिर ई ब्रह्माके तुलना रजससे ई प्रकार करऽ है:[१५]
फिर ओकर ऊ भाग जे तमस है, हे पवित्र ज्ञानके विद्यार्थी सभ (ब्रह्मचारी), रूद्र है ।
ओकर ऊ भाग जे रजस है, हे पवित्र ज्ञानके विद्यार्थी सब, ब्रह्मा है ।
ओकर ऊ भाग जे सत्त्व है, हे पवित्र ज्ञानके विद्यार्थी सब, विष्णु है ।
वास्तवमे ऊ एक हलै, ऊ तीन बन गेलै, आठ, इगारह, बारह आउ असंख्य बन गेलै ।
ई सबके भीतरे आ गेलै, ऊ सबके अधिपति बन गेलै ।
एही आत्मा है, भीतरे आउ बाहिरे, हाँ भीतर आउ बाहिरे ।
हालाँकि मैत्री उपनिषद् ब्रह्माके तुलना हिन्दुधर्मके गुण सिद्धान्तके एक तत्वसे करऽ है, पर ई उनका त्रिमूर्तिके भाग न बतावै । त्रिमूर्तिके उल्लेख बादके पुराणिक साहित्यमे मिलऽ है ।[१६]
पौराणिक साहित्य
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]भागवत पुराणमे ढेर बेर कहल गेलै हे कि ब्रह्मा ऊ है जे "कारणके सागर" से उभरलै हे ।[१७] ई पुराण कहऽ है कि जौन क्षण समय आउ ब्रह्माण्डके जन्म होलै हल, ओही क्षण ब्रह्मा हरि (विष्णु, जिनकर प्रशंसा भागवत पुराणके मुख्य उद्देश्य है) के नाभिसे निकलल एक कमलके पुष्पसे उभरलन हल । ई पुराण कहऽ है कि ब्रह्मा निद्रामे हथिन, गलती करऽ हथिन आउ ऊ ब्रह्माण्डके रचनाके समय अस्थायी रूपसे अक्षम हलन ।[१७] जखनी ऊ अपन भ्रान्ति आउ निद्रासे अवगत होलन त ऊ एक तपस्वी नियन तपस्याके, हरिके अपने हृदयमे अपना लेलन, फिर उनका ब्रह्माण्डके आरम्भ आउ अन्तके ज्ञान हो गेलै, आउ फिर उनकर रचनात्मक शक्ति पुनर्जीवित हो गेलै । भागवत पुराण कहऽ है कि एकर बाद ऊ प्रकृति आउ पुरुषके जोड़के चकाचौन्ध कर देवे वाला प्राणीके विविधता बनौलन ।[१७]
भागवत पुराण मायाके सृजनोके ब्रह्माके काम बतावऽ है । एकर सृजन ऊ केवल सृजन करेला कैलन । मायासे सब कुछ अच्छाई आउ बुराई, पदार्थ आउ आध्यात्म, आरम्भ आउ अन्तसे रङ्ग गेलै ।[१८]
पुराण समय बनावे वाला देवताके रूपमे ब्रह्माके वर्णन करऽ हथिन । ऊ मानव समयके ब्रह्माके समयके साथे तुलना करऽ हथिन । ऊ कहऽ हथिन कि महाकल्प (जे कि एक बडी बड़ ब्रह्माण्डीय अवधि है) ब्रह्माके एक दिन आउ एक रातके बराबर है ।[१९]
ब्रह्माके बारेमे विभिन्न पुराणके कथा विविध आउ विसङ्गत है । उदाहरणला स्कन्द पुराणमे पार्वतीके "ब्रह्माण्डके जननी" कहल गेलै हे । ई ब्रह्मा, देवता आउ तीनो लोकके बनावेके श्रेयो पार्वतीके दे है । ई कहऽ है कि पार्वती तीनो गुण (सत्त्व, रजस आउ तपस) के पदार्थ (प्रकृति) मे जोड़के ब्रह्माण्डके रचना कैलन ।[२०]
पौराणिक आउ तान्त्रिक साहित्य ब्रह्माके रजस गुण वाला देवके वैदिक विचारके आगे बढ़ावऽ है । ई कहऽ है कि उनकर पत्नी सरस्वतीमे सत्त्व (सन्तुलन, सामञ्जस्य, अच्छाई, पवित्रता, समग्रता, रचनात्मकता, सकारात्मकता, शान्तिपूर्णता, नेकता गुण) है । ई प्रकार ऊ ब्रह्माके रजस (उत्साह, सक्रियता, न अच्छाई न बुराई पर कहियो-कहियो दुनोमे से कोई एक, कर्मप्रधानता, व्यक्तिवाद, प्रेरित, गतिशीलता गुण) के अनुपूरण करऽ है ।[२१][२२][२३]
ब्रह्माके अवतार
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]विष्णुपुराण आउ ब्रह्मवैवर्त पुराणमे ब्रह्माके सात अवतारके वर्णन है आउ रामायणके जामवन्तोजीके ब्रह्माके अंश कहल गेलै हे ।
- महर्षि वाल्मीकि
- महर्षि कश्यप
- महर्षि बछेस
- चन्द्रदेव
- बृहस्पति
- कालिदास
- महर्षि खट
- जामवंत
इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- 1 2 James Lochtefeld, Brahman, The Illustrated Encyclopedia of Hinduism, Vol. 1: A–M, Rosen Publishing. ISBN 978-0823931798, page 122
- 1 2 PT Raju (2006), Idealistic Thought of India, Routledge, ISBN 978-1406732627, page 426 and Conclusion chapter part XII
- ↑ "संग्रहीत प्रति". Archived from the original on 4 मार्च 2016. Retrieved 26 अक्तूबर 2015.
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- ↑ "संग्रहीत प्रति". Archived from the original on 20 अक्तूबर 2015. Retrieved 26 अक्तूबर 2015.
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