भारतमे बौद्धधर्मके पतन

भारतमे बौद्धधर्मके जनम ईसा पूर्व छठा शताब्दीके होलै हल किन्तु कालक्रममे भारतसे बौद्धधर्म लगभग समाप्त हो गेलै जखनिकि विश्वके अन्य भागमे बौद्धधर्मके प्रसार एवं विकास होवित रहलै हे । भारतमे बौद्धधर्मके पतन आश्चर्यजनक लग है, विशेषतः तखनि जखनि विश्वके अन्य भागमे बौद्धधर्म बचल रहलै या ओकर प्रसार होलै । तैयो भारतमे बौद्धधर्मके पतनके अनेक कारण गिनावल जा है जेकरामे से प्रमुख कारण निम्नलिखित है -
(१) हिन्दुधर्ममे सुधार : हिन्दुधर्ममे असङ्ख्य देवी-देवता हथिन । अतः ऊ गौतम बुद्धोके अवतार मानके उनको पूजा अर्चना शुरू कर देल । इनकर कुछ सिद्धान्त जैसे सत्य आउ अहिंसाके ग्रहण कर लेलन । ब्राह्मण एवं हिन्दु विद्वानके समय पर चेत जाएके कारण हिन्दुधर्मके विघटन रुक गेलै । जे लोग हिन्दुधर्म छोड़के चल गेलन हल ओकरा ऊ पुनः स्वीकार कर लेलन ।
(२) हूणके आक्रमण : बौद्धके अधिकतम हानि हूण द्वारा होलै । ऊ हजारो भिक्षुके मौतके घाट उतार देलन । उनकर मठके खण्डहर बना देल गेलै । तक्षशिला आदि विश्वविद्यालयके आग लगा देलन तथा बौद्ध साहित्यके जरा देल गेलै । ई प्रकारसे पञ्जाब, राजपूताना आउ उत्तर पश्चिमी सीमा प्रान्तसे बौद्धके सफाया हो गेलै हल ।
(३) बौद्धधर्मके विभाजन : कनिष्कके कालमे बौद्धधर्मके विभाजन हीनयान आउ महायानके रूपमे हो गेलै हल । महायान शाखाके मूर्तिपूजाके छूट देल गेलै जेकर फलस्वरूप ढेर लोग फिरसे ई धर्ममे प्रवेश पा लेलन जे पहिले एकरा छोड़ देलन हल ।
(४) बौद्ध मठमे भ्रष्टाचार : मठमे सुख-सुविधाके मिल जाए तथा स्त्रिके भिक्षुणी बनावेके छूट देल जाएके कारण मठमे भ्रष्टाचार फैल गेलै । भिक्षु एवं भिक्षुणी सब धार्मिक कार्यके आड़मे विषय-वासनामे लग गेलन । उनकर चरित्र भ्रष्ट हो गेलै । उनकर सब त्याग, तपस्या आउ आदर्श मट्टीमे मिल गेलै । गौतम बुद्धके उपदेशके भूलाके ओखनी वासनामे लिप्त हो गेलन जेकरासे समाज पर बड़ी बुरा प्रभाव पड़लै ।
(५) राजकीय सहयोग न भेटल : कनिष्कके मृत्युके पश्चात् बौद्धके राजकीय सहयोग भेटल बन्द हो गेलै । गुप्त साम्राज्यके आ जाएके कारण हिन्दुधर्मके बढ़ावा भेटल प्रारम्भ हो गेलै । ओने बौद्धधर्म धनाभावके कारण अधिक दिन तक न चल सकलै ।
(६) बौद्धधर्ममे जटिलता आएल : बौद्ध हिन्दुके ढेर सिद्धान्त ग्रहण कर लेलन हल । जन-साधारणके भाषाके छोड़के ऊ संस्कृतमे साहित्य रचना करे लगलन । अतः ई धर्म जनताके समझसे बाहरे होवे लगलै ।
(७) हिन्दु दार्शनिकके प्रभाव : कुमारिल भट्ट आउ शङ्कराचार्य नियन हिन्दु विद्वानके मैदानमे आ जाएसे बौद्ध विद्वानके दाल गलल बन्द हो गेसै । ओखनी ई सब सिद्धान्तके तर्कके सामने न ठहर पाव हलन ।
(८) राजपूत शक्तिके विस्तार : सतमासे इगारहमा शताब्दी तक पूरा उत्तरीभारतमे राजपूतके सत्ता छा गेलै । राजपूत शक्तिके उपासक हलन । ओखनी अहिंसाके कायरता मान हवन । उनकर मत हलै कि बौद्धमतमे अहिंसाके अर्थ मृत्युके बोलावा देल होव है । अतः अहिंसा आदि सिद्धान्त ताक पर रख देल गेलै । एकरासे बौद्धधर्मके प्रचार कार्य बन्द होवे लगलै आउ ओखनी विदेशमे जाए लगलन ।
(९) मुसलमानके आक्रमण : बारहमा शताब्दीमे महमूद गजनवी आउ अन्य आक्रमणकारी भारत पर आक्रमण कैलक । बौद्धमे ओकर आक्रमणके मुकाबला करेके साहस न हलै । अतः ओखनी या त मू गेलन या निकटवर्ती क्षेत्र जैसे नेपाल, तिब्बत, बर्मा, श्रीलङ्का आदिमे चल गेलन ।
बौद्धधर्मके भारतमे पतनके आन्तरिक कारण आउ बाह्य कारण मे विभाजितो करके देखल जा सक है ।
एकरो देखथिन
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]Archived २०२२-१०-०९ at the वेबैक मशीन
Archived २०२२-१०-०३ at the वेबैक मशीन
- बौद्ध धर्म के पतन के कारण (गायत्री परिवार)
- Buddhism: Origin, Spread and Decline - Pankaj Jain, Ph.D.
- बौद्ध धर्म का पतन (चौथी दुनिया)
- Archives of Alexander Berzin: Historical Cultural and Comparative Studies (बौद्ध इतिहास और बौद्ध धर्म एवं इस्लाम के मध्य संपर्क पर चर्चा सहित)
- Revolution and Counter-Revolution in Ancient India by Bodhisattva Dr. B. R. Ambedkar