भारतीय गणित

भारतीय गणित गणितीय इतिहासमे एक प्रतिष्ठित स्थान रखहे, एकर विशेषता एकर गहन योगदान आउ उल्लेखनीय प्रगति हे जे ई क्षेत्र पर एक अमिट छाप छोड़लक हे । प्राचीनेकालसे भारतीय गणित अद्वितीय प्रतिभाके साथे विकसित भेल, जे अभूतपूर्व खोज आउ नवीन तकनीकके मार्ग प्रशस्त कैलन जे दुनियाभरके गणितज्ञके प्रेरित आउ प्रभावित करैत रहल । भारतीय गणितीय विरासतके समृद्ध प्रतिभा, रचनात्मकता आउ समय आउ स्थानसे परे सङ्ख्यात्मक अवधारणाके गहरी बुझसे बुनल गेलहे । गणितीय गवेषणाके महत्वपूर्ण भाग भारतीय उपमहाद्वीपमे उत्पन्न भेलहे । सङ्ख्या, शून्य, स्थानीय मान, अङ्कगणित, ज्यामिति, बीजगणित, कलन आदिके प्रारम्भिक कार्य भारतमे सम्पन्न भेल । गणित-विज्ञान न केवल औद्योगिक क्रान्तिके बल्कि परवर्ती कालमे भेल वैज्ञानिक उन्नतियोके केन्द्र बिन्दु रहल हे । बिन गणितके विज्ञानके कौनो शाखा पूर्ण नै हो सके । भारत औद्योगिक क्रान्तिला न केवल आर्थिक पूञ्जी प्रदान कैलक वरन् विज्ञानके नीँवके जीवन्त तत्वो प्रदान कैलक जेकर बिना मानवता विज्ञान आउ उच्च तकनीकीके ई आधुनिक दौरमे प्रवेश नै कर पावत । विदेशी विद्वानो गणितके क्षेत्रमे भारतके योगदानके मुक्तकण्ठसे सराहना कैलन हे ।
'गणित' शब्दके इतिहास
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]विश्वके प्राचीनतम ग्रन्थ वेद संहितासे गणित एवं ज्योतिषके अलग-अलग शास्त्रके रूपमे मान्यता प्राप्त हो गेलहल । यजुर्वेदमे खगोलशास्त्र (ज्योतिष) के विद्वान् लागि ‘नक्षत्रदर्श’ के प्रयोग कैलक हे एवं ई सलाह दे हे कि उत्तम प्रतिभा प्राप्त करेला ओकर पास जायेके चाही (प्रज्ञानाय नक्षत्रदर्शम्) । वेदमे शास्त्रके रूपमे 'गणित' शब्दके नामतः उल्लेख त नै कैल हे पर ई कहलक हे कि जलके विविध रूपके लेखा-जोखा रखेला 'गणक' के सहायता लेल जायेके चाही ।
शास्त्रके रूपमे 'गणित' के प्राचीनतम प्रयोग लगध ऋषि द्वारा प्रोक्त वेदाङ्ग ज्योतिष नामक ग्रन्थके एक श्लोकमे मानल जाहे । पर एकरोसे पूर्व छान्दोग्य उपनिषदमे सनत्कुमारके पूछेपर नारद जे १८ अधीत विद्याके सूची प्रस्तुत कैलन हे, ओकरामे ज्योतिषला 'नक्षत्र विद्या' एवं गणितला 'राशि विद्या' नाम प्रदान कैलन हे । एकरोसे प्रकट हे कि ऊ समय ईसभ शास्त्रके एवं इनखर विद्वानके अलग-अलग प्रसिद्धि हो चलल हल ।
आगे चलके ई शास्त्रला अनेक नाम विकसित होवैत रहल । सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त पाट या पाटी के प्रयोग कैलन । बादमे श्रीधराचार्य पाटी गणित नामसे महनीय ग्रन्थ लिखलन । तहियासे ई नाम लोकप्रिय हो गेल । पाटी या तख्ती पर खड़िया द्वारा सङ्क्रिया करेसे ई नाम समाजमे चले लगल । अरबोमे गणितके ई पद्धतिके अपनावेसे ई नामके वजन पर 'इल्म हिसाब अल तख्त' नाम प्रचलित भेल ।
परिभाषा
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]भारतीय परम्परामे गणेश दैवज्ञ अपन ग्रन्थ बुद्धिविलासिनीमें गणितके परिभाषा निम्नवत कैलन हे -
- गण्यते सङ्ख्यायते तद्गणितम् । तत्प्रतिपादकत्वेन तत्सञ्ज्ञं शास्त्रम् उच्यते ।
- (जे परिकलन कर आउ गिनहे, ऊ गणित हे एवं ऊ विज्ञान जे एकर आधार हे ओहु गणित कहला हे ।)
गणित दु प्रकारके हे -
- व्यक्तगणित या पाटीगणित - एकरामे व्यक्त राशिके प्रयोग कैल जाहे ।
- अव्यक्तगणित या बीजगणित - एकरमे अव्यक्त या आज्ञात राशिके प्रयोग कैल जाहे । अव्यक्त सङ्ख्याके 'वर्णो' कहल जाहे । एकरा 'या', 'का', 'नी' आदिसे निरूपित कैल जाहे । (जैसे आजकल रोमन अक्षर x, y, z के प्रयोग कैल जाहे । (का = कालक, नी = नीलक, या = यावत्, ता = तावत्)
भारतीय गणितज्ञ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]| विकिसूक्ति पर भारतीय गणित से सम्बन्धित उद्धरण हे । |
- The Crest of the Peacock: Non-European Roots of Mathematics (Third Edition) (Google Book By George Gheverghese Joseph)
- गणित शास्त्रके विकासके भारतीय परम्परा (गूगल् पुस्तक ; लेखक - सुद्युम्न आचार्य)
- भारतके महान् गणितज्ञ (गूगल पुस्तक ; लेखक - महेश शर्मा)
- गणितके इतिहास (गूगल पुस्तक ; डॉ ब्रज मोहन)
- भारतमे गणितके इतिहास
- भारतके वैज्ञानिक चिन्तन
- प्राचीनभारतमे गणित
Archived २०१०-०६-११ at the वेबैक मशीन (अंग्रेजी में)
Archived २०१६-०३-०९ at the वेबैक मशीन
- Cultural foundations of mathematics: the nature of mathematical proof and transmission of the calculus from India to Europe in the 16th Century (Google book ; By C. K. Raju)
- Collection of Quotes on Indian Mathematics
- Indian Mathematics: Redressing the balance (G Pearce)
- संसार के महान गणितज्ञ (गूगल पुस्तक ; लेखक - गुणाकर मूले)
- Math, Science, and Technology in India : From the Ancient to the Recent Past
- History of Indian Science & Technology : Overview of the 20-Volume Series By Rajiv Malhotra and Jay Patel
- Vedic Mathematics By Suresh Soni
- Science and Mathematics in India
Archived २०१०-०७-२८ at the वेबैक मशीन
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- Indian Mathematics History
- Ancient Indian Mathematics (I. S´ykorov´a1, University of Economics, Department of Mathematics, Prague, Czech Republic)
- Mathematics in India (Google book By Kim Plofker)
- Mathematics in India (गूगल बुक्स; किम प्लॉफ्कर)
- Mathematics in India[मृत कड़ी] (Online book ; By- Kim plofker)
- History of Ganit (वेद विज्ञान)
- Neither Newton nor Leibnitz
Archived २०११-११-२७ at the वेबैक मशीन (डॉ शारदा राजीव)
Archived २००८-१२-२० at the वेबैक मशीन
- The Mathematical Achievements of Pre-Modern Indian Mathematicians (Google Book By T K Puttaswamy)
- Geometry in Ancient and Medieval India (गूगल पुस्तक ; लेखिका- T. A. Sarasvati Amma)
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- भारत में विज्ञान के इतिहास का अध्ययन - देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय द्वारा सम्पादित चयनिका
- गणित के इतिहास का अध्ययन -ए. पी. जुस्केविक, एस. एस. डेमिदोव, एफ. ए. मेडविदोव और इ. आइ. स्लाव्युतिन, ’’नावका’’ मास्को 1974
- सुल्ब का विज्ञान - बी. दत्त, कलकत्ता, 1932
- गणित के इतिहास का अध्ययन -ए. पी. जुस्केविक, एस. एस. डेमिदोव, एफ. ए. मेडविदोव और इ. आइ. स्लाव्युतिन, ’’नावका’’ मास्को 1974 ।
- सुल्ब का विज्ञान - बी. दत्त, कलकत्ता, 1932 ।
- दी के्रस्ट ऑफ द पीकाक - जी. जी. जोसेफ, प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी प्रेस, 2000। पाइ का ज्ञान सुल्ब सूत्रकारों को ज्ञात था - आर. पी. कुलकर्णी, इंडियन जर्नल हिस्ट्री सांइस, 13 1 1978, 32-41 ।
- आर्यभट से पूर्ववर्ती बीजगणित के कुछ महत्वपूर्ण परिणाम - जी. कुमारी, मैथ. एड., सिवान, 14 1 1980, बी 5 से बी 13 ।
- अंकों का एक सार्वभौमिक इतिहासः पूर्व ऐतिहासिक काल से कम्प्यूटर के अविष्कार तक - जी. इफरा, लंदन, 1998 ।
- पाणिनि.बैकस फार्म - पी. जेड़. इंगरमैन, कम्युनिकेशन्स ऑफ दी एसीएम, 10 3 1967, 137 ।
- ज्योतिष और गणित में जैनों का योगदान - मैथ. एड., सिवान, 18 3 1984, 98-107 ।
- जैन गणित में पहली अगणनीय संख्या - आर. सी. गुप्त, गणित भारती 14 1-4 1992, 11-24 ।
- गणित के जैन स्कूल में सिस्टम थ्योरी - एल. सी. जैन, इंडियन जर्नल हिस्ट्री सोसायटी 14 1 1979, 31-65 ।
- गणित के जैन स्कूल में सिस्टम थ्योरी - एल. सी. जैन और कु. मीना जैन, इंडियन जर्नल हिस्ट्री सोसायटी, 24 3 1989, 163-180 ।
- भास्कर प्रथम, भास्कर प्रथम और उनकी कृतियां भाग 2 - के. शंकर शुक्ल, महाभास्करीय, संस्कृत, लखनउ, 1960 ।
- भास्कर प्रथम, भास्कर प्रथम और उनकी कृतियां भाग 3 - के. शंकर शुक्ल, महाभास्करीय, संस्कृत, लखनउ, 1963 ।
- सातवीं सदी में हिंदू गणित, आर्यभटीय पर भास्कर प्रथम की समीक्षा से - के. शंकर शुक्ल, गणित 22 1 1971, 115-130 ।
- बाराहमिहिर द्वारा द ब्त की गणना और पास्कल के त्रिभुज की खोज - आर. सी. गुप्त, गणित भारती 14 1-4 1992, 45.49 ।
- परिमेय त्रिभुजों और चतुर्भुजों पर महावीर के हल पर - बी. दत्त, बुलेटिन कलकत्ता, मैथ्स सोसायटी, 20 1932, 267-294 ।
- महावीर के गणित सार संग्रह पर, लगभग 850 ई. - बी. एस. जैन, इंडियन जर्नल हिस्ट्री सोसायटी, 12 1 1977, 17-32 ।
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- प्राचीन और मध्य कालीन भारत में गणित - ए. के. बाग, वाराणसी, 1979 ।
- भारत में विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास - बोस, सेन, सुबारायप्पा, इण्डियन नेशनल साइन्स एकादमी ।
- प्राचीन और मध्य कालीन भारत में ज्यामिति - टी. ए. सरस्वती, 1979, दिल्ली।
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- प्राचीन और मध्य कालीन भारत में तथा कथित फिबोनाक्सी संख्याएं - पी. सिंह, हिस्टोरिका मैथमैटिका, 12, 229-44, 1985 ।
- भारत और चीनः विज्ञान विनिमय, भारत में विज्ञान का इतिहास भाग 2 - चिन केहम्यू ।