भाष्य
संस्कृत साहित्यके परम्परामे ऊ सब ग्रन्थके भाष्य (शाब्दिक अर्थ - व्याख्या योग्य) कहल जा हे जे दोसर ग्रन्थके अर्थके वृहद् व्याख्या या टीका प्रस्तुत करऽहै ।[१] मुख्य रूपसे सूत्र ग्रन्थ पर भाष्य लिखल गेलै हे ।
- सूत्रार्थो वर्ण्यते यत्र, पदैः सुत्रानुसारिभिः ।
- स्वपदानि च वर्ण्यन्ते, भाष्यं भाष्यविदो विदुः ॥
- (अनुवाद : जौन ग्रन्थमे सूत्रमे आएल पदसे सूत्रार्थके वर्णन कैल जा है, एवं ग्रन्थकार अपना द्वारा पद प्रस्तुत करे ओकर वर्णन करऽहै, ऊ ग्रन्थके भाष्यके जानकार लोग "भाष्य" कहऽहथिन ।)
भाष्य, मोक्षके प्राप्ति हेतु अविद्या के नाश करेके साधनके रूपमे जानल जा है । वेद, ब्राह्मण एवं आरण्यकके सायणाचार्य कृत भाष्य, प्रस्थानत्रयी (उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र एवं गीता) के शङ्कराचार्य कृत भाष्य आउ पाणिनिके अष्टाध्यायी पर पतञ्जलिके व्याकरणमहाभाष्य आदि कुछ प्रसिद्ध भाष्य है ।[२]
प्रकार
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]भाष्य ढेर प्रकारके होवऽहै - प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक । जे भाष्य मूलग्रन्थके टीका करऽहै ओकरा प्राथमिक भाष्य कहल जा है । कौनो ग्रन्थके भाष्य लिखल एक अत्यन्त विद्वत्तापूर्ण कार्य मानल जा है ।
अपेक्षाकृत छोट टीकाके वाक्य या वृत्ति कहल जा है । जे रचना भाष्यके अर्थ स्पष्ट करेला रचल गेलै हे ओकरा वार्तिक कहल जा है ।
प्रमुख भाष्यके सूची
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]| वेदके भाष्य | स्कन्दस्वामी, वेंकटमाधव, सायण, स्वामी दयानन्द सरस्वती, श्रीपाद दामोदर सातवलेकर |
| निघण्टुके भाष्य | यास्क द्वारा |
| पाणिनिके अष्टाध्यायीके भाष्य | पतञ्जलिके व्याकरणमहाभाष्य |
| ब्रह्मसूत्रके भाष्य | आदि शङ्कराचार्यके भाष्य (शारीरकभाष्य); रामानुजके ब्रह्मसूत्र भाष्य (श्रीभाष्य) |
| उपनिषद् के भाष्य | शङ्कराचार्य ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक आउ श्वेताश्वतर- ई इगारह उपनिषद् के भाष्य कैलन हे । वाचस्पति मिश्र वैशेषिक दर्शनके छोड़के बाकी पाँचो दर्शन पर भाष्य लिखलन हे । |
| योगसूत्रके भाष्य | व्यासभाष्य, वाचस्पति मिश्र कृत तत्त्ववैशारदी, विज्ञानभिक्षु कृत योगवार्तिक, भोजवृत्ति |
| न्यायदर्शनके भाष्य | वात्स्यायनकृत न्यायभाष्य; वाचस्पति मिश्रके न्यायसूची, वात्स्यायनके न्यायभाष्य पर उद्योतकरके टीका - न्यायवार्तिक; न्यायवार्तिक पर वाचस्पति मिश्रके टीका - न्यायवार्तिकतात्पर्यटीका |
| मीमांसाके भाष्य | शाबरभाष्य; शाबर भाष्य पर कुमारिल भट्टके तीन वृत्तिग्रन्थ है - श्लोकवार्तिक, तन्त्रवार्तिक एवं टुप्टीका; वाचस्पति मिश्र कृत न्यायकणिका आउ तत्त्वविन्दु |
| वेदान्तके भाष्य | आदि शङ्कराचार्यके भाष्य ; वाचस्पति मिश्र कृत शाङ्करभाष्य पर टीका - भामती ; मण्डन मिश्रके ब्रह्मसिद्धि पर वाचस्पति मिश्रके व्याख्या - ब्रह्मतत्त्वसमीक्षा |
| वैशेषिकसूत्रके भाष्य | रावणभाष्य एवं भारद्वाजवृत्ति ; प्रशस्तपाद कृत पदार्थधर्मसङ्ग्रह यद्यपि एक स्वतन्त्र ग्रन्थ है, किन्तु एकरा वैशेषिकसूत्रके भाष्य कहल जा है । |
| साङ्ख्यदर्शनके भाष्य | विज्ञानभिक्षु कृत 'सांख्यप्रवचनभाष्य' |
| गीताके भाष्य | आदि शङ्कराचार्यके भाष्य |
| काव्यप्रकाश | एकर सौसे अधिक टीका है । प्रमुख टीका ई सब है- अलङ्कारसर्वस्व (रुय्यक), संकेत टीका (माणिक्यचन्द्र सूरि), दीपिका (चण्डीदास), काव्यप्रदीप (गोविन्द ठक्कुर), सुधासागर या सुबोधिनी (भीमसेन दीक्षित), दीपिका (जयन्तभट्ट), काव्यप्रकाशदर्पण (विश्वनाथ कविराज), विस्तारिका (परमानन्द चक्रवर्ती) |
| आर्यभटीयके भाष्य | भास्कर प्रथम (आर्यभटतन्त्रभाष्य), ब्रह्मगुप्त, सोमेश्वर, सूर्यदेव (भटप्रकाश), नीलकण्ठ सोमयाजि (आर्यभटीयभाष्य), परमेश्वर (भटदीपिका) आदि ।[३] |
| गणितके अन्य भाष्य | ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त पर पृथूदक स्वामी वासनाभाष्य, महाभास्करीय पर गोविन्दस्वामीके भाष्य, लल्ल के शिष्यधीवृद्धितन्त्र पर भास्कराचार्य के 'विवरण', भास्कराचार्य द्वारा अपनहीँ लीलावती, बीजगणितम् आउ सिद्धान्तशिरोमणि पर 'वासना' नामक वृत्ति, गोविन्दस्वामीके भाष्य पर परमेश्वर द्वारा सिद्धान्तदीपिका, नीलकण्ठ सोमयाजिके तन्त्रसङ्ग्रह पर शङ्कर वार्यर् कृत युक्तिदीपिका, भास्कराचार्यके बीजगणित पर सूर्यदास कृत 'सूर्यप्रकाश' |
| जैनदर्शन मे भाष्य | तत्त्वार्थसूत्र पर गन्धहस्तीमहाभाष्य (वर्तमानमे अप्राप्त), तत्त्वार्थाधिगमभाष्य |
इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]| विकिसूक्ति पर भाष्य से सम्बन्धित उद्धरण हे । |
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ Monier Monier-Williams (2002), A Sanskrit-English Dictionary, Etymologically and Philologically Arranged to cognate Indo-European Languages, Motilal Banarsidass, page 755
- ↑ A Datta (2009), Encyclopaedia of Indian Literature, Volume 2, Sahitya Akademi, ISBN 978-8126023844, page 1338
- ↑ "महान खगोलविद आर्यभट ; पृष्ठ ३६". Archived from the original on 21 अगस्त 2016. Retrieved 4 मई 2018.