रासायनिक बन्धन

कौनो अणुमे दु या दुसे अधिक परमाणु जौन बलके द्वारा एक दोसरासे बन्धल होवहे ओकरा रासायनिक बन्धन कहल जाहे । ई बन्धन रासायनिक संयोगके बाद बनहे आउ परमाणु अपनासे सबसे भिरुवाला निष्क्रिय गैसके इलेक्ट्रान विन्यास प्राप्त कर ले हे । [१]
दोसर शब्दमे रासायनिक बन्धन ऊ परिघटना हे जेकरामे दु या दुसे अधिक अणु या परमाणु एक दोसरासे आकर्षित होके आउ जुड़के एक नया अणु या आयन बनावहे (एक विशेष प्रकारके बन्धन 'धात्विक बन्धन' मे ई प्रक्रिया भिन्न होवहे) । ई प्रक्रिया सूक्ष्म स्तर पर होवहे, किन्तु एकर परिणामके स्थूलरूपमे अवलोकन कैल जा सकहे, काहेकि प्रक्रिया अनेकानेक अणु आउ परमाणुके साथे होवहे । गैसमे ई नया अणु स्वतन्त्र रूपसे मौजू़द रहहे, द्रवमे अणु या आयन ढील तौरपर जुड़ल रहहे आउ ठोसमे ई एगो आवर्ती (दुहराव वाला) ढाँचामे एक दोसरासे स्थिरतासे जुड़ल रहहे ।
बन्धनके प्रकार
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]सामान्यतः रासायनिक बन्धनके तीन भागमे विभाजित कैल जाहे -
1. आयनिक बन्ध- ई बन्धन आयनके मध्य आकर्षणसे बनहे ।
2. सहसंयोजक बन्धन - इलेक्ट्रानके समान साझासे बनहे ।
3. उपसहसंयोजक बन्धन - इलेक्ट्रानके असमान साझेदारीसे बनहे ।
संयोजकता बन्धन सिद्धान्त :
बरिस १९२७ मे हिटलर आउ लन्दन विपरीत इलेक्ट्रान चक्रणके युग्मन एवं उदासीनीकरण पर आधारित सिद्धान्त बनालक । हिटलर आउ लन्दनके अनुसार इलेक्ट्रानिक युग्म बन्ध तखनिये बनहे जखनि भाग लेवेवाला इलेक्ट्रानके चक्रण विपरीत दिशामे होवे । ई प्रकार ऊ बन्धन बनाके अपन चक्रणके उदासीनीकरण कर ले हे जेकरासे उनखर ऊर्जामे कमी आ जाहे ज बन्धके स्थायित्व प्रदान करहे ।
आधुनिक कालमे रासायनिक बन्धनके वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकारसे कैल जाहे -
- 3c-2e
- बेण्ट बन्धन
- 3c-4e
- हाइड्रोजन बन्धन,
- डाईहाईड्रोजन बन्धन,
- एगोस्टिक इण्ट्रैक्शन)
- 4c-2e
- डाइहाइड्रोजन बन्धन
- डाइहाइड्रोजन काम्प्लेक्स
- लो बैरियर हाइड्रोजन बन्धन
- सम्मितीय हाइड्रोजन बन्धन
- हाइड्रोफाइल
- अन्य असंयोजी
अन्य
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]इहो देखी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- संयोजकता
- बन्धन विपाटन (बन्धनके टूटल)
- इलेक्ट्रान विन्यास