सामग्री पर जैथिन

रेखा

विकिपीडिया से
तीन रेखाके समीकरण आउ ग्राफ : लाल रेखा आउ नीली रेखा परस्पर समानान्तर हे ।

सरल रेखा गणितमे शून्य चौड़ाई वाला अनन्त लम्बाई वाला एक आदर्श वक्र होवहे, युक्लिडीय ज्यामिति (Euclidean Geometry) के अन्तर्गत दु बिन्दुसे होके एक आउ केवल एके रेखा जा सकहे । एक सरल रेखा दु बिदुके बीचके लघतुत्तम दूरी प्रदर्शित करहे । सरल रेखा बिन्दुके सरलतम बिन्दुपथ होवहे ।

कौनो द्वी-विमीय समतल पर दु सरल रेखा या त समानान्तर होत अथवा प्रतिछेदी । एही प्रकार त्रिविममे दु रेखा परस्पर समानान्तर, प्रतिछेदी या स्क्यु (न प्रतिछेदी नहिये समानान्तर) हो सकहे ।

विभिन्न पद्धतिमे सरल रेखा

[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]
एके सरल रेखाके तीन अलग-अलग रूपवाला समीकरणसे निरूपित कैल गेलहे:
तथा .
  • बिन्दु से जायेवाला आउ x-अक्षसे कोण बनावेवाला रेखाके समीकरण:
  • उपरोक्त समीकरणके निम्नलिखित ढङ्गोसे लिख सकही (m के रेखाके प्रवणता (स्लोप) कहल जाहे) ।
उदाहरण

बिन्दु से होके जायेवाला सरल रेखा जेकर प्रवणता हे:

  • दु बिन्दु आउ जे होके जायेवाला रेखाके समीकरण ():

एकरे एहु प्रकार लिख सकही -

एकरे सारणिक (डिटर्मिनाण्ट) रूपमे निम्नलिखित प्रकारसे लिखल जा सकहे -

  • यदि कौनो रेखा x अक्ष पर y-अक्ष पर खण्ड काटहे त ओकर समीकरण-
.
  • सरल रेखाके सामान्य समीकरण (general equation):
जन्ने आउ ,[]
  • प्राचलके रूप (parametric form) मे -

ध्रुवीय निर्देशाङ्क (r, θ)

, आउ कार्तीय निर्देशाङ्कमे सम्बन्ध निम्नलिखित समीकरणसे दर्शावल जा सकहे -

अतः यदि कौनो रेखा मूल बिन्दु (0, 0)

से होके नै जाये त ओकर ध्रुवीय समीकरण निम्नलिखित होत -

जन्ने r > 0

आउ  एहाँ,  p
ऊ रेखाके मूल बिन्दुसे दूरी (सदा धनात्मक) आउ  ऊ कोण हे जे मूल बिन्दुसे रेखा पर डालल गेल लम्ब, x-अक्षसे बनावहे ।

यदि कौनो रेखा से होके जाहे आउ इकाई सदिश के समान्तर हे त ओकर समीकरण निम्नलिखित होत -

जन्ने कौनो वास्तविक सङ्ख्या हे ।

अन्तरिक्षमे कौनो बिन्दु से जायेवाला सरल रेखाके समीकरण

वास्तवमे त्रिबिम अन्तरिक्षमे सरल रेखाके दु समतलके प्रतिच्छेदके रूपमे देखल जाहे । अतः निम्नलिखित दु समीकरण सम्मिलित रूपसे एक रेखाके समीकरण हे -

३ चरमे दु एकघातीय समीकरण
  • वास्तवमे उपरोक्त दु समीकरण आलगे-अलगे दु समतलके निरूपित करहे ।
  1. Geometría Analítica ( 1980) Charles Lehmann; Editorial Limusa, ISBN 968-18-176-3; pg. 65