लघुगणक

स्कॉट्लैण्ड निवासी जॉन नेपियर द्वारा प्रतिपादित लघुगणक (Logarithm / लॉगरिद्म) एक ऐसन गणितीय युक्ति हे जेकर प्रयोगसे गणनाके लघु या छोट कैल जा सकहे । एकर प्रयोगसे गुणा आउ भाग नियन जटिल प्रक्रियाके क्रमशः जोड़ आउ घटाओ नियन अपेक्षाकृत सरल प्रक्रियामे बदल देल जा हे । सङ्गणक आउ परिकलक (calculator) के आवेके पहिले जटिल गणितीय गणना लघुगणकके सहायतेसे कैल जा हल ।
परिभाषा
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]गणितमे कौनो देल आधार पर कौनो सङ्ख्याके लघुगणक ऊ सङ्ख्या होवहे जेकर ऊ आधारके ऊपरे घात लगावेसे ओकर मान देल सङ्ख्याके बराबर हो जाये । उदाहरणला १० आधार पर १००००० (एक लाख) के लघुगणक ५ होत काहेकि आधार १० पर ५ घात लगावेसे ओकर मान १००००० हो जा हे ।
अर्थात् कौनो सङ्ख्या x, आधार b आउ घाताङ्क n, लागि
ई परिभाषा तखनियो वैध हे जखनि आधार b, 1 के अतिरिक्त कौनो अन्य धनात्मक वास्तविक सङ्ख्या होवे, अर्थात् b> 0 y b ≠ 1, x कौनो धनात्मक वास्तविक सङ्ख्या होवे (x > 0) आउ n कौनो वास्तविक सङ्ख्या होवे (n ∈ R) ।
प्रत्येक लघुगणकके आधार भेल आवश्यक हे । भिन्न-भिन्न आधारला एके सङ्ख्याके भिन्न-भिन्न लघुगणक होवहे । साधारणतः आधारला दु सङ्ख्याके व्यवहार होवहे, जिनकर अनुसार लघुगणकके दु प्रणाली बनावल गेल हे ।
प्राकृतिक प्रणालीमे लघुगणकके आधार एक अपरिमेय सङ्ख्या e मानल जा हे । एकर आविष्कारक जॉन नेपियरके नाम पर ऐसन लघुगणकके 'नेपिरीय लघुगणको' कहल जा हे । e के मान एक अनन्त श्रेणी द्वारा व्यक्त होवहे आउ लगभग 2.7182818...... के बराबर हे । उच्चगणितके सैद्धान्तिक कार्यला एही प्रणालीके प्रयोग होवहे ।
दोसर प्रणालीके आविष्कारक हेनरी ब्रिग हथ । ई प्रणालीमे लघुगणकके आधार 10 हे । एकरा 'साधारण लघुगणक' (common logarithm) कहल जा हे । ई व्यावहारिक प्रयोगला उपयुक्त हे ।
प्रतिलघुगणक : यदि log a = b त b के a के प्रतिलघु (एण्टीलॉग) कहल जा हे । जैसे, log 39.2 = 1.5933, त antilog 1.5933 = 39.2 ।
लघुगणकके गुण
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]जखनि x आउ b दुनो धनात्मक वास्तविक सङ्ख्या होवे त, logb(x) के मान एक अद्वितीय वास्तविक सङ्ख्या होवहे । आधार b के निरपेक्ष मान 0 या 1 के छोड़के कुछो हो सकहे । आधारके रूपमे प्रायः 10, e या 2 के लेल जा हे जिनकर अपन-अपन प्रयोग-क्षेत्र हे । वास्तविक सङ्ख्या एवं समिश्र सङ्ख्याके लघुगणक पारिभाषित हे ।
निम्नलिखित परिणाम लघुगणकके परिभाषासे सीधे आ जा हे -
- ,
- ,
- .
- ,
अतः
- ,
एवं
- ,
- ,
अन्ततः
- ,
- ,
एहीसे
- ,
जेकर एक विशेष स्थिति निम्नलिखित हे -
- .
उपरोक्तसे निम्नलिखित सर्वसमिका (equality) प्राप्त होवहे -
अथवा:
- सारांश आउ उदाहरण
| सूत्र | उदाहरण | |
|---|---|---|
| गुणनफल | ||
| भागफल | ||
| घात (पॉवर) | ||
| मूल |
पूर्णांश आउ अपूर्णांश
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]कौनो सङ्ख्याके लघुगणकके पूर्णाङ्क भागके पूर्णांश (Characteristic) आउ दशमलव भागके अपूर्णांश (Mantissa) कहल जा हे । उदाहरणला log10(4576) = 3.66048 होवहे । 3.66048 मे 3 पूर्णांश आउ 0.66048 अपूर्णांश हे ।
कौनो सङ्ख्याके लघुगणकके पूर्णांश ज्ञात करेके नियम निम्नलिखित हे :
- जे धनात्मक सङ्ख्या (>1) के पूर्णाङ्क भागमे M+1 अङ्क होवे, ऊ सङ्ख्याके लघुगणकके पूर्णांश M होवहे । जैसे 245 के लघुगणकके पूर्णांश 2 होत काहेकि 245 मे (2+1) अङ्क हे । एही प्रकार 245.67 के पूर्णांशो 2 होत काहेकि 245.67 के पूर्ण भागमे (2+1) अङ्के हे ।
- जे धनात्मक सङ्ख्या (<1) मे दशमलव बिन्दुके बाद M शून्यके बाद कौनो अशून्य अङ्क आवहे, ओकर लघुगणकके पूर्णांश -(M+1) होवहे । जैसे 0.0034 मे दशमलवके बाद दु शून्य आवेके बादे अशून्य अङ्क (3) आवैत हे; एहीसे एकर पूर्णांश = -(2+1) = -3 (ऋण तीन) होत ।
अपूर्णांश ज्ञात करेके नियम निम्नलिखित हे :
अपूर्णांश सङ्ख्याके मान आउ ओकरामे व्यवहृत अङ्कके क्रम पर निर्भर करहे । यदि दु सङ्ख्यामे एके प्रकारके अङ्क एके क्रममे व्यवहृत होवे आउ केवल दशमलव बिन्दुके स्थान भिन्न होवे, त ऊसब सङ्ख्याके अपूर्णांश एके होत, काहेकि अपूर्णांश सङ्ख्यामे दशमलव बिन्दुके स्थान पर निर्भर नै होवहे । उदाहरणला 4538 आउ 45.38 दुनोके अपूर्णांश समान होत यद्यपि दुनोके पूर्णांश अलगे-अलगे (क्रमशः 3 आउ 1) होत ।
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]बाहरी कड़ी
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- DC Logarithmic Amplifiers
- Explaining Logarithms
- Logarithm on MathWorld
- Jost Burgi, Swiss Inventor of Logarithms
- Logarithm calculators and word problems with work shown, for school students
- Translation of Napier's work on logarithms
- Logarithms - from The Little Handbook of Statistical Practice
- Algorithm for determining Log values for any base