वामन
| भगवान् वामन अवतार | |
|---|---|
भगवान् वामन | |
| अन्यनाम | आदित्य, उपेन्द्र, विक्रम, त्रिविक्रम, काश्यप, अदितिनन्दन आदि । |
| सम्बन्ध | स्वयं भगवान् |
| निवासस्थान | बैकुण्ठ |
| मन्त्र | ॐ वामनाय नमः |
| अस्त्र | कमण्डल, छत्र (छतरी), जपमाला आउ पुस्तक |
| जीवनसङ्गी | ब्रह्मचारी |
| माता-पिता |
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| भाई-बहिन | इन्द्र, विवस्वान् आउ वरुण सहित अन्य आदित्य |
| शास्त्र | भागवत पुराण, विष्णु पुराण, वामन पुराण |
| त्योहार | श्रवण द्वादशी (वामन द्वादशी) अथवा श्रोणम् (ओणम) |
| इतिहास · देवता |
| सम्प्रदाय · पूजा · |
| आस्था दर्शन |
|---|
| पुनर्जन्म · मोक्ष |
| कर्म · माया |
| दर्शन · धर्म |
| वेदान्त ·योग |
| शाकाहार शाकम्भरी · आयुर्वेद |
| युग · संस्कार |
| भक्ति {{हिन्दु दर्शन}} |
| ग्रन्थशास्त्र |
| वेद संहिता · वेदाङ्ग |
| ब्राह्मणग्रन्थ · आरण्यक |
| उपनिषद् · श्रीमद्भगवद्गीता |
| रामायण · महाभारत |
| सूत्र · पुराण |
| शिक्षापत्री · वचनामृत |
| सम्बन्धित |
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| हिन्दु मापनप्रणाली |

श्रीवामन भगवान् विष्णुके अवतार हथिन । त्रेतायुगके प्रारम्भ होवे पर भगवान् विष्णु बक्सरमे माय गङ्गाके तट पर सिद्धाश्रम स्थल पर वामन रूपमे देवी अदितिके गर्भसे उत्पन्न होलन । एहीसे ई स्थानके वामन जन्मस्थली आउ वामनाश्रमो कहल जा है । एकरे साथे ई भगवान् विष्णुके पहिला ऐसन अवतार हलन जे मानव रूपमे प्रकट होलन — बालक रूपी ब्राह्मण अवतार । दक्षिण भारतमे इनकर मूल नाम उपेन्द्र से जानल जा है । इनकर पिता प्रजापति कश्यप हलन आउ माता अदिति हलन । इनकर बड़े भाई विवस्वान् , इन्द्र, वरुण , पूषा , अर्यमा , भग , धाता , पर्जन्य , अंशुमान् , त्वष्टा आउ मित्र हलन ।
उत्पत्ति
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भगवान् वामन ऋषि कश्यप आउ उनकर पत्नी अदितिके पुत्र हलन ।[१] ऊ आदित्य सबमे बारहमा हलन । ऐसन मान्यता है कि ऊ इन्द्रके छोट भाई हलन ।

भागवत कथाके अनुसार विष्णु इन्द्रके देवलोकमे अधिकार पुनः स्थापित करेला ई अवतार लेलन । देवलोक असुर राजा बलि हड़प लेलकै हल । बलि विरोचनके पुत्र आउ विष्णु भक्त प्रह्लादके पौत्र हलै आउ एक दयालु असुर राजाके रूपमे जानल जा हलै । एहु कहल जा है कि अपन तपस्या आउ शक्तिके माध्यमसे बलि त्रिलोक पर आधिपत्य पा लेलकै हल ।[२] वामन एगो बौना ब्राह्मणके वेषमे बलि भिरु गेलन आउ उनकासे अपन रहेला तीन पग भूमि देवेके आग्रह कैलन । उनकर हाथमे एक लकड़ीके छत्र (छाता) हलै । गुरु शुक्राचार्यके चेतावहुँ पर बलि वामनके वचन दे देलकै ।

भगवान् वामन अपन आकार एतना बढ़ा लेलन कि पहिलहीँ पगमे पूरा भूलोक (पृथ्वी) नाप लेलन । दोसर पगमे देवलोक नाप लेलन । एकर पश्चात् ब्रह्मा अपन कमण्डलके जलसे वामनके पाँव धोइलन । एही जलसे गङ्गा उत्पन्न होलै ।[३] तीसरे पगला कोनो भूमि बचवे न करलै । वचनके पक्का बली तखनि वामनके तीसरा पग रखेला अपन माथा प्रस्तुत कर देलन । वामन बलिके वचनबद्धतासे अति प्रसन्न होलन । यतः राजा बलिके दादा प्रह्लाद भगवान् विष्णुके परम् भक्त हलन, भगवान् वामन (विष्णु) बलिके सुुताल लोक देवेके निश्चय कैलन आउ अपन तीसरा पग बलिके माथा पर रखलन जेकराके फलस्वरूप बलि सुतालमे पहुँच गेलै ।
एगो आउ कथाके अनुसार वामन बलिके माथा पर अपन गोड़ रखके ओकरा अमरत्व प्रदान कर देलन ।[४] विष्णु अपन विराट रूपमे प्रकट होलन आउ राजाके महाबलि के उपाधि प्रदान कैलन काहेकि बलि अपन धर्मपरायणता आउ वचनबद्धताके कारण अपनाके महात्मा सिद्ध कर देलकै हल । विष्णु महाबलिके आध्यात्मिक आकाश जाएके अनुमति दे देलन जने ओकर अपन सद्गुणी दादा प्रहलाद आउ अन्य दैवीय आत्मासे भेट होलै ।[४]

प्रतीकात्मकता
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वामनावतारके रूपमे विष्णु बलिके ई पाठ देलन कि दम्भ आउ अहङ्कारसे जीवनमे कुछो न भेटा हे आउ एहु कि धन-सम्पदा क्षणभङ्गुर होवऽ हे । ऐसन मानल जा है कि भगवान् विष्णुके देलन वरदानके कारण प्रतिवर्ष बलि प्रतिपदा पर राजा बलि धरती पर आगमन करऽ हथिन आउ ई सुनिश्चित करऽ हथिन कि उनकर प्रजा सुखी रहे ।[४]
रामायणमे
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]अध्यात्म रामायणके अनुसार राजा बलि भगवान् वामनके सुतल लोकमे द्वारपाल बन गेलन[५][६] आउ सदैव बनल रहतथिन ।[७] तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानसोमे एकर ऐसने उल्लेख है ।[८]
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ मनुस्मृति
Archived २००८-०७-०६ at the वेबैक मशीन बरस १८४० ई मे होरेस हेमैन विल्सन द्वारा अनुवादित विष्णु पुराणके पुस्तक सङ्ख्या ३ अध्याय १ मे श्लोक २६५:२२ - ↑ "वामनावतार". Archived from the original on 5 अप्रैल 2011. Retrieved 2012-04-11.
- ↑ "देवगण". सनातन सोसाइटी. Archived from the original on 3 मई 2012. Retrieved 2012-04-11.
- 1 2 3 "त्रिविक्रम". वैखरी. Archived from the original on 12 मार्च 2012. Retrieved 2012-04-11.
- ↑ P. 281 The Adhyatma Ramayana: Concise English Version By Chandan Lal Dhody
- ↑ P. 134 Srī Rūpa Gosvāmī's Bhakti-rasāmṛta-Sindhuh By Rūpagosvāmī, Bhakti Hridaya Bon
- ↑ P. 134 Sri Rūpa Gosvāmīs Bhakti-rasāmrta-sindhuh By Rūpagosvāmī
- ↑ P. 246 Complete Works of Gosvami Tulsidas By Satya Prakash Bahadur, Tulasīdāsa
