सतुआन
| सतुआन | |
|---|---|
| अन्य नाम | सतुआनि, सतुआ सकरात, बिसुआ |
| प्रकार | धार्मिक, सांस्कृतिक, बसन्तके परब |
| उत्सव | सतु खाएल |
| तिथि | १४ अप्रैल |
| आवृत्ति | वार्षिक |
सतुआन परब जेकरा सतुआनी आउ बिसुआ एहु कहल जा है । ई बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखण्डके मुख्य लोकपरबके तौरपर मनावल जा है । ई लोकपरब ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी, आउ मौसमके बदले (मौसम परिवर्तन) से गहराई से जुड़ल है । ई परब हर साल मेष सङ्क्रान्तिके दिन मनावल जा है । ई दिन सुरुज मेष राशिमे प्रवेश कर है, जहिया सुरुज बिसुवत रेखा से उत्तर दन्ने जा है तहिये ई परब मनावल जा है । ई परब वैसाख महीना (१४ अप्रैल) मे होव है । एहि दिनसे खरमासोके समाप्ति मानल जा है आउ हिन्दु सौर नववर्षोके शुरूआत मानल जा है ।
इतिहास
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]
सतुआन के दिनेसे सब माङ्गलिक कामके शुरूआत होब है । सतुआन धार्मिक लोकपरबके साथे प्रकृति आउ स्वास्थ्यसे जुड़ल उत्सवो है । ई परब गरमीके आबेके सन्देस दे है आउ किसान नया फसल खास करके रबी फसलके घरे आबेसे खुशी होके ई परब मनाव है । साथे अगला कृषि-चक्रके योजना बनावहै । ई दिन शरीरके शीतल करेवाला आउ ऊर्जा प्रदान करेवाला खाना खाएल जा है । ई परब प्रकृतिके साथ तालमेल बैठावे आउ सीधा-सादा, सहज, सरल जीवन जीएला प्रेरित कर है । सतुआनके दिन लोग सबेरे गङ्गामे नहाके सुरूज देवके अर्घ्य देव है, पूजा-पाठ कर है, ब्राह्मण आउ गरीबके अनाज, पानी, सतुआ, आम, ककड़ी, खीरा, पङ्खा, घड़ा आउ पैसा आदि दान कर है आउ भोजन कराव है । ई दिन दान-पुण्य करेके विशेष महत्व होब है । सब लोग श्रद्धाके साथ सरल पूजा कर हथिन । सतुआ सङ्क्रान्तिके दिन चीनी, गुड़ चाहे नून देके सतुआके शरबत, सतुआके लडुआ, कच्चा आम, प्याज, मिचाई, नीम्बू, अचार आदि खाएल जा है, जे गर्मीके मौसममे बड़ी लाभकारी होव है आउ शरीरमे शीतलता प्रदान कर है । ई परबसे सीख मिल है कि छोटा दान अगर श्रद्धासे करल जा है त ऊ बड़ा फल दे है । ई परब लोकजीवनके सादगी, परोपकार, दान, शुभ कामके शुरूआत, सादा आउ स्वस्थ्य भोजन, प्रकृतिके प्रति प्रेम, सम्मान आउ आभार रखेके सन्देश दे है ।[१]
सन्दर्भ
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]- ↑ "कल मनाया जाएगा सतुआन पर्व, सत्तू खाने की परंपरा के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य" (in हिन्दी).
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