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सरस्वती

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माता सरस्वती
सङ्गीत, कला, वाणी, मातृत्व, आध्यात्मिकता, विद्या, ज्ञान, ग्रन्थ, मन्त्र, तन्त्र, ज्ञान, विद्या आउ नदीके अधिष्ठात्री देवी; मन्त्र (दक्षिण मार्ग/वैदिक मार्ग) आउ तन्त्र (वाम मार्ग) के देवी
विद्याके देवी माता सरस्वती
अन्यनामब्राह्मणी, गायत्री, दुर्गा, ब्रह्मापत्नी, विधिप्रिया, शक्ति, वागेश्वरी, वाणिश्वरी, बुद्धिदात्री, सिद्धिदात्री, आदि पराशक्ति, जगजन्नी, भारती, शारदा, हमंसवाहिनी, भगवती सावित्री, ब्रह्मचारिणी, वरदायनी,चन्द्रघण्टा, भुवनेश्वरी, भगवती, जगदम्बा एवं अन्य अनगिनत नाम
सम्बन्धआदि पराशक्ति, ब्राह्मणी, गायत्री, जगजननी, आदि पराशक्ति, देवी, मातङ्गी आउ आदि शक्ति
निवासस्थानब्रह्मलोक
मन्त्रॐ ऐं सरस्वत्यैं नमः ॥
अस्त्रवीणा, वेद, जापमाला, ब्रह्मास्त्र
जीवनसङ्गीब्रह्मा
माता-पिताकौनो न
भाई-बहिनशिव (बड़ भाई)
सन्तानप्रजापति, स्वयंभू मनु, सप्त ऋषि एवं अन्य
सवारीराजहंस, कमल
शास्त्रब्रह्मवैवर्त पुराण, स्कन्द पुराण, गणेश पुराण, विष्णु पुराण, देवी भागवत पुराण, शिव पुराण, कालिका पुराण, तन्त्र चुरामणी, एवं अन्य सब पुराण, रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद्
क्षेत्रसर्वस्व इनकर पूजा कैल जा है
त्योहारबसन्त पञ्चमी, नवरात्रि मुख्यता सतमा दिन, श्रावण मासके शुक्रवारके इनकर पूजा होवऽ है

सरस्वती हिन्दुधर्मके प्रमुख वैदिक एवं पौराणिक देवीमे से हथिन । सनातन धर्मशास्त्रमे दु सरस्वती माताके वर्णन आवऽ है, ब्रह्मा पत्नी सरस्वती मूल प्रकृतिसे उत्पन्न सतोगुण महाशक्ति एवं प्रमुख त्रिदेवीमे से एक हथिन । ब्रह्माके पत्नी सरस्वती ब्रह्माके जिह्वासे प्रकट होवेके कारण ब्रह्माके पुत्री मानल जा हथिन । धर्मशास्त्रेके अनुसार समान नाम स्वरूप, प्रकृति, शक्ति एवं ब्रह्मज्ञान-विद्या आदिके अधिष्ठात्री देवी मानल गेलन हे, एहीसे इनकर ध्यान आराधनामे जादे भेद न बतावल गेलै हे।

ब्रह्म विद्या एवं नृत्य सङ्गीत क्षेत्रके अधिष्ठाताके रूपमे दक्षिणामूर्ति/नटराज शिव एवं सरस्वती दुनोके मानल जा है । एही कारण दुर्गा सप्तशतीके मूर्ति रहस्यमे दुनोके एके प्रकृतिके कहल गेलै हे । अतः सरस्वतीके १०८ नाममे इनका शिवानुजा (शिवके छोट बहिन) कहोके सम्बोधित कैल गेलै हे ।

कहुँ-कहुँ ब्रह्मा पुत्री सरस्वतीके ब्रह्मा पत्नी सरस्वतीसे सम्पूर्णतः अलगे मानल जा है । ई प्रकार मतान्तरमे तीन सरस्वतिओके वर्णन आवऽ है । एकर अन्य पर्याय या नाम है वाणी, शारदा, वागेश्वरी, वेदमाता इत्यादि ।

ई शुक्लवर्ण, शुक्लाम्बरा, वीणा-पुस्तक-धारिणी आउ श्वेतपद्मासना कहल गेलन हे । इनकर उपासना करेसे मूर्खो विद्वान् बन सकऽ है । माघ शुक्ल पञ्चमी (श्रीपञ्चमी/बसन्तपञ्चमी) के इनकर विशेष रूपसे पूजन करेके परम्परा है ।

देवी सरस्वतीके वर्णन वेदके मेधा सूक्तमे उपनिषद, रामायण, महाभारतके अतिरिक्त कालिका उपपुराण, श्रीमद् देवी भागवत महापुराण इत्यादि है । एकर इलावा ब्रह्मवैवर्त पुराणमे पत्रस्वतीके विशेष उल्लेख आएल है । पर ई ब्रह्मासे सम्पूर्ण अलग है ।[१]

वैदिक सनातन एवं बौद्धधर्मके अपेक्षा जैनधर्मके सरस्वती (श्रुतदेवी) के वृहद स्तर पर पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त होलै हे । जैन शिल्पमे यक्षी, अम्बिका एवं चक्रेश्वरीके बाद सरस्वतिए सर्वाधिक लोकप्रिय देवी रहलन हे । सरस्वती (श्रुतदेवी) के सबसे प्राचीन प्रतिमा कङ्काली टिला (मथुरा) से प्राप्त होलै हे जे १३२ ई के है । एकर अतिरिक्त जैन परम्परामे बड़ी सुन्दर सरस्वती (श्रुतदेवी) प्रतिमा पल्लू (बीकानेर) आउ लाडनूँ आदिसे प्राप्त होलै हे ।[२] [३]

जापानमे सरस्वतीके 'बेञ्जाइतेन' कहल जा हे । जापानमे उनकर चित्रन हाथमे एक सङ्गीत वाद्य लेले कैल जा है । जापानमे ऊ ज्ञान, सङ्गीत आउ 'प्रवाहित होवे वाला' वस्तुके देवीके रूपमे पूजित हथिन ।

दक्षिण एशियाके इलावा थाइलैण्ड, इण्डोनेशिया, जापान एवं अन्य देशोमे सरस्वतीजीके पूजा होवऽ है ।

अन्य भाष/देशमे सरस्वतीजीके नाम-
  • बर्मा - थुयथदी (သူရဿတီ=सूरस्सती, उच्चारण: [θùja̰ðədì] या [θùɹa̰ðədì])
  • बर्मा - तिपिटक मेदा Tipitaka Medaw (တိပိဋကမယ်တော်, उच्चारण: [tḭpḭtəka̰ mɛ̀dɔ̀])
  • चीन - बियानचाइत्यान Biàncáitiān (辯才天)
  1. ↑ "संग्रहीत प्रति". Archived from the original on 28 जुलाई 2018. Retrieved 13 जनवरी 2020.
  2. ↑ Dr. Shanti Swaroop Sinha, Dr. Maruti Nandan Pd. Tiwari. "CONCEPT OF SARASWATI IN JAIN TRADITION AND ART" (PDF). Archived from the original (PDF) on 18 सितम्बर 2020. Retrieved 13 अप्रैल 2020. {{cite journal}}: Cite journal requires |journal= (help)
  3. ↑ देश-विदेश में अतिप्राचीन जैन श्रुत देवी सरस्वती प्रतिमाएं (in Hindi), retrieved 2020-04-13

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