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सीमा (गणित)

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गणितमे सीमा (limit) के सङ्कल्पना एक अत्यन्त मौलिक सङ्कल्पना हे । सीमाके सङ्कल्पनाके विकासके परिणामस्वरूपे कलनके जन्म सम्भव भेल । सीमाके प्रयोग कौनो फलनके अवकलज निकाले एवं कौनो फलनके कौनो बिन्दु पर सातत्य (continuity) के परीक्षणमे होवहे ।

गणितमे सीमाके दु अर्थ हे -

  1. कौनो फलनके सीमा
  2. कौनो श्रेढीके सीमा ।
अनन्त पर फलनके सीमा

जखनि ऊ फलनके कौनो स्वतन्त्र चर कौनो देल मानके अत्यन्त निकटवर्ती मान धारण करहे, ऊ स्थितिमे फलनके मान ऊ फलनके सीमा कहला हे । ध्यान रहे कि अत्यन्त निकटवर्ती मान बड़ी महत्वपूर्ण हे काहेकि स्वतन्त्र चर राशिके कुछ मानला फलनके मान अगणनीय (indeterminate) हो सकहे । स्वतन्त्र चरके मान यादृच्छ रूपसे (arbitrarily) बड़ होवेके स्थितिमे फलनके मानके चर राशिके अनन्त दन्ने अग्रसर होवेपर फलनके सीमा कहल जाहे ।

कौनो श्रेढीके सूचकाङ्क (index) अनन्त रूपसे बड़ होवेके दशामे ओकर पद (terms) के रूझान जौन मान दन्ने होवहे, ओकरा ऊ श्रेढीके सीमा कहल जाहे ।

निम्नलिखित फलनके ले ही -

= पर एकर मान पारिभाषित नै कैल गेलहे । किन्तु जखनि x, 1 दन्ने अग्रसर होवहे त के सीमाके अस्तित्व हे । नीचेके सारणियोसे स्पष्ट हे कि

f(0.9)f(0.99)f(0.999)f(1.0)f(1.001)f(1.01)f(1.1)
1.951.991.999 undef 2.0012.0102.10

ई सारणीसे स्पष्ट हे कि जखनि किन्तु के मान के जेत्ता निकट सोच सकही ओत्ता निकट ले जायी त के मानो के अत्यन्त निकट पहुँचल जाहे ।








  • ,जन्ने b एक नियताङ्क हे ।


निम्नलिखित सम्बन्ध खाली ओही दशामे सही हे जखनि दहिना दन्नेके सीमाके अस्तित्व होवे एवं ऊ अनन्त नै हवे-




  • ,किन्तु हियाँ हर (डीनेमिनेटर) के सीमा शून्य नै होवेके चाही ।